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गुरुवार, 31 मार्च 2016

साक्षात्कार - श्री चौधरी वीरेन्द्र सिंह, केन्द्रीय मंत्री, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार



प्र. 1 – जनधन योजना, आधार कार्ड और मोबाईल बैंकिंग (जैम) जैसी आधुनिक तकीनीकि के द्वारा ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत के ग्रामीण आंचल को किस प्रकार लाभांवित कर रहा है ?
उ. 1 - 10 माह पूर्व लगभग 3 करोड लोगों के बैंक में खाते थे परंतु अब प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत लगभग 19 करोड लोगों के बैंक में खाते खुल चुके हैं । 6 करोड 14 लाख लोगों के सक्रिय बैंक खाते हैं, जिन्हें मनरेगा का लाभ मिल रहा है अर्थात उनके बैंक खातों में सीधा पैसा भेजा जाता है ।   प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत मनरेगा में काम करने वाले लाभार्थियों को उनके सक्रिय बैक खातें अथवा डाकखानों द्वारा राशि प्रदान की जाती है । इसके कारण से लीकेज की संभावना नगण्य हो गई है परिणामत: लाभार्थियों को सौ प्रतिशत लाभ मिल रहा है । आधार कार्ड का विषय अभी सुप्रीम कोर्ट में है परंतु हमारा ऐसा मानना है कि यदि आधार कार्ड को बैंक खाते से जोडा जायेगा तो अधिक पारदर्शिता आयेगी क्योंकि आधार कार्ड के कारण किसी भी व्यक्ति का डुपलीकेट खाता नही खुल पाता है । सीधा पैसा (डायरेक्ट कैश ट्रांसफर) लाभार्थियों को मिले, इसके लिए आधार कार्ड एक बेंचमार्क है । आज लगभग 65 प्रतिशत लोगों के बैंक में खाते हैं, जिनका मैने जिक्र किया है, लगभग 30 – 35 प्रतिशत लोगों के पास डाकखानों के माध्यम से सीधा पैसा (डायरेक्ट कैश ट्रांसफर) लाभार्थियों को दिया जाता है ।   

प्र. 2 – क्या जैम व्यवस्था वर्तमान समय में पीडीएस व्यवस्था का ही आधुनिक स्वरूप है ?
उ. 2 – पीडीएस की प्रमाणिकता और आधार कार्ड पर बने बैक खातों की प्रमाणिकता में थोडा – बहुत अंतर है । हम यह मानते हैं कि हमारे बैंक खाते अधिक प्रमाणिक हैं ।

प्र. 3 – ग्रामीण आंचल के नवयुवकों का कौशल – विकास आपके मंत्रालय द्वारा किस प्रकार किया जा रहा है ? 
उ. 3 – दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के माध्यम से हम युवाओं को कृषि के अलावा तकनीकि ज्ञान देते हैं जिसके कारण देश के लगभग 10 करोड से अधिक युवा लाभांवित हो रहें हैं क्योंकि हम ऐसा मानते हैं कि तकनीकि ज्ञान के कारण ग्रामीण युवाओं में उनके कौशल का अधिक विकास होगा  जिसके कारण उनकी अजीविका हेतु उनके सामने कृषि के अलावा सेवा क्षेत्र जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अधिक विकल्प होंगे । इस योजना में अबतक कुल 25 प्रतिशत ही खर्च होता था लेकिन मंत्रिमंडल के साथ चर्चा करके अब हम अधिक धनराशि इस योजना में खर्च करेंगे ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण युवा इस योजना से लाभांवित हो सके । लगभग 70 प्रतिशत से अधिक इस योजना से लाभांवित ग्रामीण युवाओं को रोजगार हेतु आश्वस्त किया गया है । सरल शब्दों में, जो भी 100 ग्रामीण युवा इस योजना के अंतर्गत ट्रेनिंग लेंगे उनमें से 70 ग्रामीण युवा को रोजगार अवश्य मिलेगा । विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में हमारे ट्रेनिंग सेंटर चलते हैं और अबतक लगभग 6 लाख से अधिक युवा ट्रेनिंग ले चुके हैं । हमारा लक्ष्य है कि अगले कुछ वर्षों में लगभग 10 लाख से अधिक युवाओं को ट्रेनिंग दे चुके होगें । आपको यह बताना चाहता हूँ कि ग्रामीण युवाओं को दी जाने वाली ट्रेनिंग का सारा खर्चा सरकार वहन करती है और ट्रेनिंग प्राप्त युवा को यदि मासिक वेतन कम मिलता है तो उसकी मासिक आमदनी (लगभग छ: मास) बढने तक उसे प्रति माह 1000 रूपया सरकार देती है साथ ही यदि ट्रेनिंग प्राप्त कोई युवा विदेश जाता है और वहाँ उसे मासिक वेतन कम मिलता है तो उसे भी प्रति माह 10,000 रूपये सरकार देगी ।   
  
प्र. 4 – ग्रामीण तकनीकि के द्वारा ग्रामीण आंचल में रहने वाले लोगों को लाभ पहुँचाने हेतु आपके मंत्रालय का किस प्रकार योगदान होता है अथवा आपके मंत्रालय की इस प्रकार की कोई योजना है ?     
उ. 4 – ग्रामीण कारीगर अथवा कलाकार की वस्तुओं की मार्केटिंग अच्छी तरह नही हो पाती है इसलिए उन्हें उचित मूल्य नही मिल पाता । परंतु हम इस कोशिश में हैं कि उसके द्वारा निर्मित की वस्तुओं की ‘ब्रैंड वैल्यू’ अधिक हों ताकि उसे अच्छी कीमत मिले और किसी बिचौलिए की बजाय उसे सीधा लाभ पहुँच सके । इसी को मैं ग्रामीण तकनीकि मानता हूँ ।

प्र. 5 – स्वच्छ भारत अभियान के बारें में बताईये ।
उ. 5 – 15 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री जी की घोषणा के साथ ही हमारे मंत्रालय ने उस पर कार्यांवयन प्रारम्भ कर दिया । प्रधानमंत्री जी के सपनों को हम वर्ष 2019 से पहले ही पूरा कर लेगें । ग्रामीण आंचल में हमारे सामने 11 करोड 11 लाख शौचालय बनाने का लक्ष्य है, जिसमें से हमने अबतक 6 करोड 70 लाख शौचालय बनवा चुके हैं । 2 अक्टूबर 2019 को हमारी सबसे बडी श्रद्धांजली यही होगी कि उस दिन हम यह कह सकेंगे कि भारत में अब हर घर शौचालय – युक्त है ।

प्र. 6 – कपार्ट को पुन: शुरू करने की कोई योजना है ? साथ इन सभी विभिन्न योजनाओं से क्या आपको लगता है कि अजीविका हेतु गाँव से शहरों की ओर पलायन रुकेगा ?  
उ. 6 – हाँ ! कपार्ट को हम पुन: शुरू करने वाले हैं । यहाँ मैं एक बात कहना चाहता हूँ कि किसी भी छोटे उद्यमी को आगे बढने हेतु अवसर चाहिए जिसके लिए वह शहर की तरफ जाता है । हमारी सरकार इस दिशा में कार्य कर रही है कि छोटे उद्यमियों को उसके गाँव के आसपास ही उन्हें आर्थिक समेत विभिन्न अवसर उपलब्ध हो, जिससे कारण अवश्य ही पलायन रुकेगा ।      

प्र. 7 - प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना पर आपकी संक्षिप्त टिप्पणी क्या है ?
उ. 7 – हमारे मंत्रालय की सबसे बडी योजना ही यही है । उपर्युक्त जो बाते अभी तक हमने की उसका मूल ही यही योजना है । एक वाक्य में मैं आपको बताऊँ कि इस योजना के कारण ही भारत के ग्रामीण आंचल में रहने वाले लोगों को दुनिया के बारें में जानने का अवसर प्राप्त हुआ है ।     

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1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (02-04-2016) को "फर्ज और कर्ज" (चर्चा अंक-2300) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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मूर्ख दिवस की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'