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रविवार, 1 दिसंबर 2013

दिल्ली चुनाव - डा. हर्षवर्धन



प्र. महंगाई की मार दिल्ली की जनता त्राहि-त्राहि कर रही है. इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है ?
उ. यह सरकार की जिम्मेदारी है कि लोगो को वह खाने – पीने का समान सुलभ करवाने की व्यवस्था न कि जाकर गली – गली मे खुद दुकान खोल कर बेचना शुरू कर दे. जो सरकार जनता को खाने-पीने का समान भी सुलभ नही करवा सकती उस सरकार का सत्ता मे रहने का कोई औचित्य ही नही है.
प्र. दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए कई वर्षो से मांग उठाई जाती रही है पर उस मांग पर कोई कार्यवाही नही होती है. अगर दिल्ली की जनता दिल्ली की सत्ता आपको सौपती है तो दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए आप क्या करेंगे ?
उ. कांग्रेस की दिल्ली मे 15 वर्ष और उसमे से 10 वर्ष केन्द्र मे भी उन्ही की सरकार है. 15 वर्ष सत्ता मे रहने के  बावजूद इसके अगर शीला दीक्षित जी यह कहे कि इस विषय को मै राहुल गाँधी से कहुंगी...तो शीला दीक्षित जी दिल्ली की जनता को यह बताये कि उन्होने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए क्या किया है ? अगर आप बीजेपी का मैनीफेस्टो देखे तो आपको पता चल जायेगा कि ही दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के           लिए हमारी कोशिशे लगातार चल रहीं है. जनसंघ के जमाने से लेकर अब तक केन्द्र मे हमे एक बार ही 6 साल सत्ता मे आने का अवसर मिला था. उस समय देश के उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी जी ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए देश की संसद मे एक विधेयक भी पेश किया था तो कांग्रेस के ही लोगो की उस विधेयक पर कई प्रकार की आपत्तियाँ थी. कांग्रेस की आपत्तियों को ध्यान मे रखकर ही अटल जी और आडवाणी जी ने उसे एक कमिटी को रेफर करते हुए कहा था कि कांग्रेस के लोगो की जो आपत्तियाँ है उसे ध्यान मे रखकर अगर कुछ संशोधन करना है तो वह कर लिया जाय. आपको जानकर यह आश्चर्य होगा कि उस समय उस कमेटी के अध्यक्ष कोई साधारण नेता नही थे अपितु श्री प्रणव मुखर्जी जी ही थी जो कि वर्तमान समय मे देश के राष्ट्रपति है. परंतु 2004 तक उस कमेटी ने कोई रिपोर्ट नही दिया और उसके बाद हमारी पार्टी की सत्ता चली गई. तबसे लेकर आज तक तो केन्द्र मे उन्ही की सरकार है तो शीला दीक्षित जी इस विषय पर क्या किया ? जबकि देश ने महिला सुरक्षा को लेकर दामिनी – प्रकरण पर देश के युवाओं के आक्रोश को देखा परंतु शीला जी कह देती है कि दिल्ली पुलिस हमारे अधीन नही है परंतु वे यह भूल गई कि दिल्ली पुलिस उनके अधीन नही है परंतु केन्द्र के अधीन तो है और केन्द्र मे उन्ही की पार्टी की ही सरकार है. मेरे हिसाब से इस समस्या के दो ही कारण है 1. वे सभी समस्याओं को गंभीरता से नही लेती या फिर उनकी बातो को उनकी पार्टी के केन्द्र के लोग शीला जी के सुनते नही हैं.   
प्र. राहुल गाँधी जी ने अपने एक भाषण मे कहा था कि दिल्ली के लोगो को सरकार की योजनाओं का लाभ न मिले इसके लिए दिल्ली-भाजपा तरह-तरह के हथकंडे अपनाती है और महिला आरक्षण बिल को पास नही होने देती है. इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है ?
उ. यह तो बडी खुशी की बात है राहुल गाँधी जी ने यह मान लिया है दिल्ली भाजपा इतनी शक्तिशाली हो गई है कि वह सरकार की योजनाओं को भी लागू नही होने दी रही है. तब तो अब यह तय हो गया है कि 2013 मे हम दिल्ली की सरकार बनायेंगे और 2014 मे हम केन्द्र मे सरकार बनायेंगे.
प्र. दिल्ली मे महिलाओं की सुरक्षा और दिल्ली के युवाओं को लेकर आपकी क्या योजनाएँ होंगी ?
उ. दिल्ली की महिलाएँ सबसे अधिक त्रस्त है. उनकी रसोई की सभी चीजे बहुत महंगी हो चुकी है. दिल्ली की महिलाओं की सुरक्षा को लेकर मीडिया के कई सर्वे मैने पढे है और यह पाया है कि लगभग हर सर्वें में ही 90 प्रतिशत महिलाओं ने यह माना है कि दिल्ली मे वे असुरक्षित महसूस करती है. वह भी यह हालत तब है जब दिल्ली की मुख्यमंत्री भी एक महिला ही है. पिछले ही दिनो आपकी ही साथी दामिनी के साथ जब अमानवीय व्यवहार हुआ तो झट से शीला जी ने कह दिया कि इतनी रात को उसे घर से बाहर निकलने की जरूरत ही क्या थी. वह यह भूल गई कि दिल्ली के सभी परिवारों की आर्थिक हालत ऐसी नही है कि उनके माता-पिता उन्हे अच्छी पढाई करवा सके. ऐसे मे दिल्ली के अधिकांश घरों की बच्चियाँ अपनी पढाई इत्यादि के खर्चे हेतु या अपने परिवार को आर्थिक सहयोग करने हेतु अथवा अपने भाई-बहनो को पढाने हेतु नौकरी करने घर से बाहर जाती है. अब अगर उनकी नौकरी देर शाम तक की है अथवा रात्रि की है तो घर से बाहर ही रहेंगी. मैने दुनियाँ के कई देशो मे भी देखा कि वहाँ महिलाएँ बिना किसी चिंता और असुरक्षा के भय से निश्चितिंत होकर बाहर घूमती है. दिल्ली के अन्धेरे-क्षेत्रों मे पर्याप्त रोशनी कर, प्राईवेट सुरक्षा गार्डो की भर्ती कर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहिये.   अगर हम सत्ता मे आते है तो हम दिल्ली की महिलाओं के साथ शीला जी को भी पूरी सुरक्षा देने का वादा देते है.
प्र. दिल्ली विश्वविद्यालय मे दिल्ली के बच्चो को प्रवेश आसानी से नही मिलता. आप की क्या राय है ?

उ. इसके लिए हमे दूरगामी योजनाएँ बनाने की आवश्यकता है. हमे यह तय करना होगा कि दिल्ली-विश्वविद्यालय के कालेजो मे दो-शिफ्ट चलाकर दिल्ली के बच्चो को भी दिल्ली विश्वविद्यालय मे प्रवेश दिया जा सकता है.
- राजीव गुप्ता