पेज

कुल पेज दृश्य

गुरुवार, 31 अक्तूबर 2013

मध्यप्रदेश चुनाव- श्री शिवराज सिंह चौहान


1.मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव-2013 के आपके मुद्दे क्या है ? कांग्रेस ने अपना मुद्दा तय किया है। उनके इस बार के चुनावी मुद्दे है - अवैध उत्खनन और भ्रष्टाचार।
उत्तरः- भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा इन 10 सालों में किया गया विकास और जनकल्याण ही हमारा मुद्दा हैं। हमने कहा है कि जो हमने इन 10 सालों में किया उसका हिसाब हम जनता को दे रहे है कांग्रेस 50 सालों का हिसाब दें। अटल ज्योति अभियान में बिजली अबाध रूप से 24 घंटे 90 हजार कि.मी. से अधिक सड़कों का निर्माण और 25 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचत कर आजादी के बाद का अब तक का सबसे बड़ा रिकार्ड रहा है। हमारा मुद्दा एक ही है विकास विकास और विकास।
2.आप नवम्बर 2005 से म.प्र. के मुख्यमंत्री हैं, आपने आदिवासियों के विकास के लिये क्या-क्या योजनाएं बनाई क्योंकि पिछले दिनों धार में आपने जन आशीर्वाद यात्रा के   दौरान कांग्रेस पर आपने आदिवासियों के वोट बैंक को यूज करने के आरोप के पीछे आपका तथ्य क्या है ?
उत्तरः- आदिवासियों को जमीन के अधिकार से लेकर मुफ्त जांच दवा एवं उपचार चलित अस्पताल, छात्रावासों और स्कूलों की स्थापना जैसे कई कार्य वनवासी बंधूओं के लिये किये गये। 2003 तक 730 करोड़ रूपयें वनवासी विकास के लिये खर्च किये जाते थे। 2013 में 3230 करोड़ रूपये वनवासीयों के विकास और कल्याण के लिये खर्च किये गये। हमने वनवासियों से सिधे संवाद के लिये वनवासी सम्मान यात्रा निकाली। वनवासी नायक महापुरूषों के स्मारक बनाए। आदिवासियों के मजरे टोले पर 140 करोड़
3.            कांग्रेस के म.प्र. अध्यक्ष श्री कांतिलाल भूरिया जी ने अपनी परिवर्तन यात्रा के दौरान     आपके 14 मंत्रियों के ऊपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि       लोकायुक्त के घेरे मे होने के बावजूद भी सरकार ने उन पर कोई कार्यवाही नहीं की       साथ ही एक आईएएस अधिकारी से लेकर बिजली विभाग के मीटर रीडर से लेकर    एक चपरासी तक के घरों में से करोडो- अरबों की संपत्ति बरामद हुई है। इस पर आपकी क्या टिप्पणी है ?
उत्तरः- कांग्रेस ने विपक्ष के नाते केवल एक काम किया है, झूठे आरोप लगाना और दुष्प्रचार      करना। हमने भ्रष्टाचार के खिलाफ भाषण नहीं कानून बनायें हैं, विशेष न्यायालय      अधिनियम हमने बनाया। भ्रष्टाचार के मामलों में फास्ट ट्रेक कोर्ट में सुनवाई और दोषी   होने पर संपत्ति राजसात करने के प्रावधान करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य है। इसी       का परिणाम है, कि लोकसेवा गारंटी अधिनियम और विशेष न्यायालय अधिनियम के       परिणाम जनता के लिए सुखद रहे है।
4.            कांग्रेस व अन्य राजनैतिक चिंतको का ऐसा मानना है कि म.प्र. में इस बार एंटी कम्बैंसी फैक्टर भी रहेगा, साथ ही आपके एक मंत्री श्री बाबूलाल गौर का भी मानना है कि इस बार 50-60 विधायकांे का टिकट काटना ही भाजपा के लिए फायदेमन्द रहेगा आपका क्या मानना है।
उत्तरः- मैं स्वयं जनता के आशीर्वाद लेने के लिए जनता के बीच जन आशीर्वाद यात्रा के माध्यम से पहुंचा हूं। बड़ी तादाद में जनता जर्नादन ने उपस्थित होकर मुझे आशीर्वाद दिया। रात के 12-12 बजे, बरसते पानी में बच्चे, महिलाएं, बूढ़े यदि आशीर्वाद दे रहे हो तो यह भारतीय जनता पार्टी सरकार के लिए प्रो-इनकम्बेंसी है। गुस्से में तो कोई जनता घर से बाहर आकर यूं ही आशीर्वाद देने नहीं आती।
5.            म.प्र. भाजपा में अन्दर ही अन्दर धमासान मचा हुआ है अभी हाल में ही आपके राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजनाथ सिंह ने म.प्र. के इंदौर अपना दौरा रद्द करने पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री कांतिलाल भूरिया ने कहा कि यह ताई-भाई अर्थात इन्दौर से भाजपा सांसद श्रीमती सुमित्रा महाजन और आपका उद्योग मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय की लडाई है जो अब खुलकर जनता के सामने आई है इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है ?
उत्तरः- मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी एक स्वर और एक जुट रही है और पूरी सिद्दत के साथ हम चुनाव में जा रहे है। एकता का पाखंड और डिण्ढौरा कांग्रेसी पीट रहे है। बयान अलग-अलग देते है और काम अलग-अलग है और जनता को भ्रमित करने के लिए एक साथ हाथ उठाने का दिखावा करते है।
6.            आपके विधानसभा चुनाव क्षेत्र बुधनी में केन्द्रीय मंत्री श्री कमलनाथ ने कहा कि केन्द्र में मंत्री बनने के बाद म.प्र. को सबसे अधिक पैसा दिया है परंतु म.प्र. का नौजवान आज दिल्ली, मुम्बई मे रोजगार के लिए भटकता है साथ ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी आपकी सरकार पर यह आरोप लगाया है कि म.प्र. मे शिवराज सिंह की सरकार नहीं एसएस अर्थात सूर्यवंशी और शर्मा की सरकार है इस पर आपकी टिप्पणी क्या है ?
उत्तरः- मध्यप्रदेश को, मध्यप्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता का हक मिलना चाहिए था वह केन्द्र की यूपीए सरकार ने नहीं दिया। मध्यप्रदेश के साथ भेदभाव लगातार किया गया। लेकिन हमने इसके बावजूद भी सफलता अर्जित की है। हमने पांच लाख तो मात्र सरकारी नौकरियां दी, इससे ज्यादा हमने युवाओं में कौशल उन्नयन के लिए स्किल डेवलपमेंट सेंटर, उद्यमता विकास के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में 25 लाख तक के ऋण सरकार ने अपने गारंटी पर देने का काम किया है। कांग्रेस के शासनकाल में नौकरी के लिए और उसके पहले पढ़ाई के लिए छात्र पलायन कर रहे थे और गरीब एवं मध्यम वर्ग के परिवार अपने बच्चों को पढ़ाने में असमर्थ महसूस करते थे।
7.            पिछले दिनों म.प्र. सरकार की मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना का कई जगह विज्ञापन देखा जिसमें यह लिखा था एक दिन की मजदूरी में पूरे महीने का राशन इस योजना के अंतर्गत 1 रू. किलो गेहूँ और 2रू. किलो चावल देने का कार्यक्रम शुरू किया है। परंतु आप पर यह आरोप है कि आपने है कि आपने ऐसी कोई नई योजना नही शुरू की   अपितु पहले से चली आ रही केन्द्रीय योजना को ही फेरबदल कर बना दिया है- जिसमें गरीबों को 5रू. किलो गेहूँ और 6.50 रू. किलो चावल सस्ते राशन की दुकान    वाली योजना के अंतर्गत देती थी। इस पर आपका क्या विचार है।
उत्तरः- मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना मध्यप्रदेश सरकार बरसो से चला रहे अब तो हमने एक दिन की मजदूरी में पूरे महीने के राशन की व्यवस्था की है। हम एक रूपया किलो गेंहू दो रूपये किलो चावल दे रहे है। ऐसा कांग्रेस की दूसरी सरकारें क्यों नहीं कर पाती। हमने गरीब की भूख की चिंता की है। भारतीय जनता पार्टी सरकार समाज के उस वर्ग की सबसे पहले चिंता करती है जो सबसे पीछे है, जो सबसे नीचे है।
8.            म.प्र. सरकार जहाँ गरीब घरो की बच्चियों की शादी करवा रही है वहीं दुसरी तरफ राघव जी जैसे मामलों से आपकी किरकिरी भी हुई है। आपकी पार्टी इस राघव जी जैसे कलंक से कैसे बच पायेगी।
उत्तरः- मध्यप्रदेश में हमने गरीब कन्याओं के विवाह के लिए मुख्यमंत्री कन्यादान योजना एवं मुख्यमंत्री निकाह योजना बनाई है। हमने अब तक 250000 गरीब कन्याओं का कन्यादान किया है। मध्यप्रदेश में कानून का राज है, कानून अपना काम करता है।
9.            म.प्र. के युवाओं के लिए आपके पास क्या कार्यक्रम है।
उत्तरः- मध्यप्रदेश में युवाओं के लिए उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और रोजगार के लिए बेहतर कार्यक्रम बनाये गये है। कांग्रेस के शासन में छात्र पढ़ने को दूसरे राज्यों में जाते थे। आज हमने तो स्किल डेवलपमेंट संेटर, वोकेशनल एजुकेशन के लिए युर्निवसिटी का भी प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 25 लाख तक तक ऋण सरकार की गारंटी पर देने की योजना शुरू की। मुख्यमंत्री युवा कान्ट्रेक्टर योजना, माँ तुझे प्रणाम जैसे अभिनव प्रयोग मध्यप्रदेश में हमने किये है। हम चाहते है कि मध्यप्रदेश का युवा नौकरी मांगने वाला नहीं, देने वाला बने। हमने पांच लाख सरकारी नौकरियां भी दी है।
10.          6 जून 2013 को महामहिम राष्ट्रपति ने मुगालिया कोट अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी     विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया। म.प्र. में हिन्दी विश्वविद्यालय खोलने की आपको प्रेरणा कहाँ से मिली ?
उत्तरः- मैंने बचपन से दी देखा है कि हिंदी भाषी युवा अगर पिछड़ता है, तो उसका कारण भाषा बनती है। मध्यप्रदेश का युवा हिंदी में सोचता है, हिंदी बोलता है, हिंदी जानता है, तो क्यों न उसे हिंदी में ही उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा सुलभ हो सके ये मेरी बचपन से पीड़ा थी। हिंदी विश्वविद्यालय इस समस्या को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।
11.          म.प्र. की जनता आपको जन-नेता की बजाय अपना बडा भाई मानती है, पिछले दिनों भाजपा की एक महिला रजिया अख्तार ने कहा कि हमारा लक्ष्य है बडे भाई को पुनः सीएम बनाना। इस पर आपकी प्रतिक्रिया।
उत्तरः- मध्यप्रदेश की जनता को मैंने अपने परिवार की भांति ही माना है। मैंने छात्र जीवन से लेकर अब तक पूरे मध्यप्रदेश को देखा है, समझा है। दर्द सबका एक जैसा ही होता है, एक जैसी जरूरते हैं। राजनीति में काम करते-करते अगर आपके जनता से रिश्ते बनते है और जनता आपसे रिश्ता कायम करती है तो वो भरोसा राजनेता निभाये यहीं अपेक्षा जनता की रहती है। हमने जनता के भरोसे को बनायें रखने का प्रयास किया है। मैं हर पल, हर क्षण मरते दम तक जनता के भरोसे को बनायें रखूंगा।
12.          230 विधानसभा सीटों में से पिछली बार आपने 143 सीटों आपकी पार्टी ने जीती थी। इस बार आपको कितनी सीटें जीतने का अनुमान है ? क्योंकि मात्र 1.5 प्रतिशत का अंतर ही म.प्र. की सरकार बनाता है ?
उत्तरः- मैं कोई अनुमान या अटकल नहीं लगाता लेकिन यह तय है कि जनता के आशीर्वाद से मध्यप्रदेश में भाजपा को जबरदस्त बहुमत मिलने जा रहा है।
13.          25 सितम्बर को म.प्र. भाजपा ने जंबूरी मैदान में एक इतिहास रचा। मीडिया के हवाले   से यह खबर भी पता चली की कि 7.71 लाख लोगो की भीड जुटाकर भाजपा ने गिनीज बुक में नाम भी दर्ज करवा लिया। आखिर ऐसा जनसैलाब उमडने के पीछे का        कारण क्या है।
उत्तरः- 25 सितम्बर को निसंदेह भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इतिहास रचा है। कार्यकर्ता महाकुंभ दुनिया का सबसे बड़ा राजनैतिक आयोजन था। वास्तव मंे पार्टी में कार्यकर्ताओं का भरोसा, सरकार में कार्यकर्ताओं का भरोसा ही ऐसे आयोजन की सफलता का कारण बनते है।
14.          भ्रष्टाचार, महंगाई जैसे क्या केन्द्र के मुद्दे म.प्र. विधानसभा चुनाव में भारी रहेगे अथवा म.प्र. के स्थानीय मुद्दे ही इस विधानसभा चुनाव मे छाये रहेंगे ?
उत्तरः- केन्द्र की यूपीए सरकार ने लाखों करोड़ के भ्रष्टाचार जनता की गाढ़ी कमाई में किये है। जनता आक्रोशित है। वही दूसरी और महंगाई के कारण गरीब और मध्यम वर्ग बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। यूपीए सरकार इससे बच नहीं सकती। ये जनता के मुद्दे है।
15.          आपने मदरसों में गीता पढाने के लिये निर्देश दिया है तो साथ ही चार धाम और अजमेर की मुफ्त यात्रा जैसे कई धार्मिक फैसले लिये हैं क्या ये राजनीतिक फैसले है ?
उत्तरः- हम मध्यप्रदेश की साढ़े सात करोड़ की जनता को एक रूप में देखते है, कोई भेदभाव या पक्षपात भाजपा सरकार मंे नहीं होता। मध्यप्रदेश सरकार ने तय किया कि जो बुजुर्ग है और तीर्थ यात्रा करना चाहते है लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, तो क्यों न सरकारी खर्च पर उनको तीर्थ यात्रा कराई जाये। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने श्रवण की भूमिका निभाई है।
16.          25 सितम्बर को म.प्र. जंबूरी मैदान में आपने दो बातें प्रमुखता से कही- 1. आपको बडा दुःख होता है जब आप यह देखते है कि चीन दीये और राखी भी बना रहा, क्या म.प्र.        यह काम नही कर सकता ? आपने यह कहकर लोगो को एक संभावना दी है क्या यह महज चुनाी घोषणा थी अथवा आप इस गंभीर विषय पर कोई ठोस योजना बनायेंगे। 2. आपने यूपीए -2 को भ्रष्टाचार, पाप की लंका कहा है, तो क्या म.प्र. आगामी लोकसभा   चुनाव में हनुमान जी बनकर पाप की लंका को खाक कर देगा क्योंकि मीडिया के हवाले से मोदी जी म.प्र. से कम से कम इस बार 20 लोकसभा सीटे जीतने का अनुमान कर रहे है।
उत्तरः- हां, मुझे दुःख होता है कि छोटी-छोटी चींजे चीन बनाता है, हमारे देश मंे बेचता है। हमारा युवा क्यों नहीं कर सकता, जरूर कर सकता है और वो कर सके इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार ने उसके उद्यमिता विकास के लिए योजनाएं बनाई है। आगे भी हम इस दिशा में संपूर्ण रूप से विचार कर रहे है। विधानसभा चुनाव और बाद में लोकसभा चुनाव में हम अपेक्षा से अधिक सींटे जीतकर आने वाले है।
19.          क्या इस बार भी पिछली बार की तरह वर्ष 2013 के दिसम्बर महीने मे श्री शिवराज सिंह म.प्र. के मुख्यमंत्री केे रूप मे तीसरी बार भी शपथ लेंगे ?
उत्तरः- निश्चित ही मध्यप्रदेश के साढ़े सात करोड़ की जनता का आशीर्वाद हमारे साथ है। भारतीय जनता पार्टी भारी बहुमत से
- राजीव गुप्ता


               

                                                                                                                                               
                                                                                                                                                                                                               


छत्तीसगढ चुनाव - डा. रमन सिंह


प्र. छत्तीसगढ विधानसभा चुनाव – 2013 के आपके पास प्रमुख मुद्दे क्या हैं ?
उ. 2008 के विधानसभा चुनाव के भाजपा - चुनाव घोषणा पत्र में हमने जो कुछ वादा किया था, हमने सभी वादों को पूरी ईमानदारी से पूरा भी किया है. पीडीएस का न केवल व्यापक रूप से आप देख सकते है अपितु आज पूरे देश में पीडीएस अपनी पहचान बना चुका है. साथ ही खाद्यान सुरक्षा से पोषण सुरक्षा तक अब तक लगभग 42 लाख ज्यादा परिवार लाभांवित हो रहे हैं. वनवासी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए चरण पादुका, साडी, सोलर लैम्प, स्वास्थ्य योजना इत्यादि जैसी कई ‘अंत्योदय’ योजनाएँ है जिनसे लाखो परिवारो को लाभ मिल रहा है. छत्तीसगढ की जनता को यह अहसास है कि भाजपा सरकार ही उनके चहुमुखी विकास के लिए न केवल सोचती है अपितु अंतिम व्यक्ति तक उसकी योजनाओं का सीधा-सीधा लाभ भी मिलता है. इतना ही नही पिछले दिनों छत्तीसगढ की आम जनता की प्रतिक्रिया लेने हेतु हमने 6000 किमी. की ‘विकास यात्रा’ किया. उस विकास यात्रा को इतना व्यापक जन-समर्थन मिला जिसके कारण मुझे व्यक्तिगत तौर पर एक अद्भुत अहसास हुआ. जो एंटी-एनकम्बैंसी की बात करते है वो मुझे दूर-दूर तक कही नही दिखाई पडी. आज समाज के सभी वर्गों के चेहरे पर एक उत्साह देखने को मिलता है. हमने सारी योजनाएँ जाति-आधारित न करके अपितु समाज के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखकर चलाई. स्व-सुरक्षा योजना व्यापक स्तर पर सबके लिए है. आज छत्तीसगढ बिजली – क्षेत्र में सबसे अग्रणी हैं. इतना ही नही राज्य के सभी गरीब बच्चों के लिए टैबलेट, साईकिल, छात्रवृति जैसी योजनाओं चलाकर उन्हे प्रोत्साहित किया. आज़ादी से लेकर अभी तक जो कमियाँ थी उन्हे कम करने का भरपूर प्रयास किया गया है. जिसके कारण छत्तीसगढ की जनता में आप बदलाव का भाव देख सकते है. आगे भी हम अंत्योदय – केन्द्रित योजनाएँ बनायेंगे.
प्र. योजनाएँ अच्छी है जिसे छत्तीसगढ की जनता ने सराहा भी है परंतु स्थानीय स्तर पर लोगों का ऐसा भी मानना है कि भ्रष्टाचार के कारण योजनाओं का लाभ पूर्ण रूप से उन तक नही पँहुच पाया. क्या आपको नही लगता कि स्थानीय स्तर पर तंत्र को और मजबूत को और मजबूत कर भ्रष्टाचार को रोकना चाहिए ?
उ. तंत्र को मजबूत और जवाबदेह बनाना – यह सरकार की प्राथमिकता और कर्तव्य है. परंतु आपको मैं छतीसगढ की एक बात बताता हूँ – पीडीएस से लाभांवित 42 लाख परिवार में से आपको 42 लोग भी ऐसे नही मिलेगे जो इस योजना को लेकर शिकायत कर सके. इतना ही देश के स्थिति से विपरीत आपको छतीसगढ में देखने को मिलेगा कि शिक्षको व पुलिस की भर्तियों मे भी आपको कोई शिकायत नही मिलेगी. हमने तय किया कि बच्चों को स्कूल छोडने से पहले उन्हे जातीय प्रमाण पत्र मिल जाना चाहिए और इसकी जवाबदेही वहाँ के कलेक्टर की है और आज आपको छतीसगढ मे यह जवाबदेही देखने को मिल जायेगी कि जिन मुद्दों को लेकर लोग भटकते थे उन्हे दूर करने का हमने पूरा प्रयास किया है.
प्र. नक्सली समस्याओं के चलते दंतेवाडा समेत नक्सल प्रभावित क्षेत्र की आम जनता तक सरकार की योजनाओं का लाभ नही मिल पा रहा है. इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है ?
उ. नक्सल की समस्या आज देश के कई राज्य जूझ रहे है. हमे भी बहुत चिंता है और इस चुनौती से लड भी रहे है. जहाँ पर कभी प्रशासन नाम की कोई चीज ही नही थी आज हमने वहाँ भी ‘थाने’ बनाकर नक्सलियों की पकड को कमजोर कर दिया है. आंकडो से भी आप देख सकते है कि नक्सली घटनाओं मे अब कमी आई है.
प्र. 10 वर्ष का भाजपा शासन के चलते एंटी-एंकम्बैंसी फैक्टर के साथ – साथ कांग्रेस की चुनौती भी है. इसे आप किस तरह देखते है ?
उ. चुनौती तो रहेगी ही पर जनता के पास जाने के लिए कांग्रेस के पास मुद्दे ही नही है. जो 100 दिन में मँह्गाई कम करने के लिए मनमोहन-सोनिया सरकार ने जनता से वादा किया था. आज पता नही कितने 100 दिन निकल गए परन्तु महँगाई कम होने की बजाय उसमे 10 गुनी बढोत्तरी हो गई है. आम जनता आज यह पूछती है कि चावल, गेहूँ, दाल, नमक, यूरिया, सब्जी, तेल जैसी उपभोग की दैनिक वस्तुएँ आज इतना मँहगी क्यो हो गई है ?
प्र. अगर छतीसगढ में भाजपा की तीसरी बार सरकार बनती है तो आपकी योजनाएँ क्या होगी ?
उ. हम गुजरात की तरह सडक, बिजली, रेल, सिंचाई-संसाधन जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर के अनेक क्षेत्रों में आगे बढेंगे जिसके कारण देश में छत्तीसगढ की गिनती पहले तीसरे राज्यों में हो.
प्र. छत्तीसगढ के बारे मे ऐसा कहा जाता है कि रायपुर की गद्दी उसे ही मिलती है जो बस्तर मे अधिक से अधिक सीटे जीतता है. पिछले चुनाव मे बस्तर की 12 सीटो मे से आपने 11 सीटे जीती थी. इस बार बस्तर मे आपको कितनी सीटे जीतने का अनुमान है ?
उ. हमने बस्तर मे बहुत काम किया है. जिस प्रकार से पिछले चुनाव मे जनता ने हमको 11 सीटो पर अपना आशीर्वाद दिया था. इस बार भी हमे लगता है कि बस्तर की जनता हमे सभी सीटो पर अपना आशीर्वाद देगी.
प्र. आपने अम्बिकापुर मे एक नकली लालकिला बनवाया था जिससे नरेन्द्रमोदी ने अपना भाषण दिया था. आप पर उस ‘लालकिले’ को लेकर फिज़ूलखर्ची का आरोप लगा गया था. इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है साथ ही छतीसगढ में क्या नरेन्द्रमोदी का जादू चलेगा ?
उ. फिजूलखर्ची की बात ही गलत है. एक सामान्य – सा मंच बनाया गया था. कांग्रेस की चिंता मंच नही वहाँ उमडे जन-सैलाब को देखकर है. डेढ लाख से भी अधिक लोग उस सभा मे पँहुचे थे, अब इतने बडे जन- सैलाब को देखकर कांग्रेस को चिंता तो होगी ही.
प्र. 2008 के चुनाव मे आपने चावल – योजना, जिसके तहत आपने चावल 1 रू. किलो देने की बात की थी जिसके चलते छत्तीसगढ की जनता आपको ‘चाउर बाबा’ के नाम से भी जानती है. क्या 2013 मे आप चावल – मुफ्त देने की योजना बना रहे है ?
उ. खाद्यान और पोषण जैसी योजनाओं का क्रियान्वयन हम और अच्छी तरह से करेंगे.
प्र. पिछले ही दिनों छत्तीसगढ को मनरेगा में देश में दूसरा स्थान मिला. परिवर्तन यात्रा और घर-घर  कांग्रेस अभियान में इन दिनों कांग्रेस के पदाधिकारी राज्य सरकार को कोस-कोस कर गाली दे रहे हैं. राज्य सरकार पर कोयला घोटाले सहित अनेक आरोप भी लगा रहे हैं. लेकिन जैसे ही कांग्रेस के नेता राज्य सरकार पर आरोपों का सिलसिला शुरू करते हैं. उन्ही की केन्द्र सरकार, छत्तीसगढ़ में किसी न किसी केन्द्रीय योजना को लेकर रमन सरकार की पीठ थपथपा देती है. अब इसे क्या कहा जाये कि ये महज संयोग है अथवा वास्तविकता है ?
उ. बडे-बडे लोग कोयला घोटाले मे घिरे है परंतु छतीसगढ - भाजपा सरकार पर किसी ने भी कोई आरोप नही लगाये है. मात्र वे सभी कागज पर नारे लगाते है.   

- राजीव गुप्ता

दिल्ली चुनाव – श्री विजय गोयल


प्र. दिल्ली विधानसभा चुनाव – 2013 हेतु आपके पास मुद्दे क्या – क्या है ?
उ. इस बार दिल्ली विधान सभा  के चुनाव मे हमारे मुख्यत: पाँच मुद्दे है – बिजली, पानी, मह्ंगाई, भ्रष्टाचार और महिलाओं की सुरक्षा.
प्र. मंगोलपुरी की सभा में राहुल गाँधी ने दिल्ली - यातायात के बारें मे शीला दीक्षित जी की तारीफ करते हुए दिल्ली – मैट्रो का क्रैडिट भी उन्हे दे दिया. इस पर आपकी टिप्प्णी क्या है ?
उ. मैने श्री राहुल गांधी को न्यौता भेजा है कि मेरे साथ एक बार वे दिल्ली घूम ले उन्हे दिल्ली-यातायात की खस्ता हालत के बारें में खुद पता चल जायेगा और रही बात दिल्ली मैट्रो की तो वे थोडा होमवर्क करके बोला करें. क्या उन्होने श्री अटल बिहारी वाजपेयी, श्री लालकृष्ण आडवाणी और श्री मदन लाल खुराना जी द्वारा दिल्ली – मेट्रो के उद्घाटन वाला चित्र नही देखा. अगर नही देखा है तो देख ले फिर बोले.
प्र. दिल्ली में प्याज बहुत रुला रहा है. शीला जी कहती है कि उन्होने एक हफ्ते से प्याज नही खाया है. इस पर आपकी प्रतिक्रिया क्या है ?
उ. भ्रष्टाचार और कालाबजारी के चलते दिल्ली को प्याज रुला रहा है. आज हमारे नेता शीला जी को प्याज भेंट करने गये है.    
प्र. दिल्ली भारत की राजधानी होने के कारण देश भर से लोग यहाँ निरंतर आते रहते है. ऐसे में व्यवस्था का चरमराना स्वाभाविक है. क्या आपके पास ऐसी कोई ठोस रणनीति है कि क्षेत्रफल के हिसाब से दिल्ली की सीमा को बढाया जा सके ?
उ. इसलिए मेरा यह मानना है कि दिल्ली की कोई भी योजना आगे के 20 साल को ध्यान मे रखकर ही बनाना चाहिए. 20 साल बाद दिल्ली की जनसंख्या को ध्यान में ही रखकर अस्पताल, सडक, बिजली, पानी, स्कूल इत्यादि की योजना करना चाहिए. दिल्ली-एनसीआर की कल्पना इन्ही सब बातों को ध्यान मे रखकर ही गई थी पर कांग्रेस सरकार ने उस दिशा में कोई काम ही नही किया.     
प्र. दिल्ली के नवयुवक-युवतियों के लिए आपके पास क्या कार्यक्रम है ?
उ. दिल्ली के नौजवानों के लिए सबसे पहले रोजगार उत्पन्न करवाने है. आईटी क्षेत्र के बच्चे जो बाहर जाकर नौकरी कर रहे है, उन्हे दिल्ली मे ही रोजगार देकर उनका पलायन रोका जायेगा. दिल्ली के बच्चों के लिए अधिक स्कूल, कालेज खोले जायेंगे और दिल्ली के विश्वविद्यालयों मे दिल्ली के बच्चों के अधिक सीटे रखी जायेगी.
प्र. कल मंगोलपुरी की सभा में राहुल गाँधी ने दिल्ली मे 5 विश्वविद्यालय खोले जाने का भी दावा किया. इस पर आपकी टिप्प्णी क्या है ?
उ. श्री राहुल गांधी को सही जानकारी नही है. एक नया अम्बेडकर कालेज खोला गया है जिसमें 250 बच्चे पढते है.
प्र. दिल्ली मे दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू, जामिया जैसी कई सेंट्रल यूनीवर्सिटी भी है पर दिल्ली के बच्चे उनमे दाखिला नही ले पाते. ऐसे मे दिल्ली के बच्चो को सेंट्रल यूनीवर्सिटी मे दाखिला मिले इसके लिए आपके क्या योजना है ?
उ. ये विश्वविद्यालय तो पहले से ही है परंतु दिल्ली के बच्चे इन विश्वविद्यालयों मे प्रवेश ले ही नही पाते है. हमारा यह मानना है कि इन सभी विश्वविद्यालयों में दिल्ली के बच्चों को 2-4 प्रतिशत तक अंको की छूट देकर प्राथमिकता देना ही चाहिए.
प्र. आप पार्टी आंकडो का हवाला देकर दावा करती है कि सरकार उनकी ही बनेगी. इस पर अगर आपको सरकार बनाने हेतु जनादेश नही मिलता तो क्या कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने हेतु आप अथवा किसी अन्य दल से हाथ मिलायेंगे ?
उ. उन्होने तो घोषणा कर रखी है कि वे किसी से हाथ मिलाने मे विश्वास नही करते है.
प्र. आपने बिजली की बढी हुई दरों को लेकर दिल्ली में बिजली-आन्दोलन भी चलाया पर बिजली के बढे हुए दाम कम नही हुए. इसके विपरीत शीला जी यह कहती है कि दिल्ली मे 24 घंटे बिजली रहती है. इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है ?
उ. अगर आप 24 घंटे बिजली देगी तो क्या उसके लिए आम आदमी को 100 रूपये प्रति युनिट चुकाना होगा. तो फिर आप सत्ता की कुर्सी पर बैठकर कर क्या रही है.
प्र. आज भी दिल्ली के अधिकांश लोगो को दिल्ली जल बोर्ड का पानी नसीब नही  है. इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है ?
उ. एक नहर के द्वारा हरियाणा से पानी लेने की बात शुरू की गई थी पर हरिय़ाणा आज अपनी मनमर्जी चलाता है और ये हरियाणा की पोल खुलने के डर से उसको कुछ बोल नही पाती हैं क्योंकि दोनो ही जगह कांग्रेस की सरकार है. पर्ंतु ज्योहि दिल्ली मे भाजपा की सरकार बनेगी हम हरिय़ाणा के कंठ से खींच कर पानी लायेंगे और दिल्लीवासियों की प्यास बुझायेंगे.
प्र. दिल्ली मे कई अनाधिकृत कालोनियाँ व कई झुग्गी-झोपडियाँ है. क्या आपके पास कोई ऐसी योजना है जिसके तहत अनाधिकृत कालोनियों को अधिकृत कर दिया जाय व झुग्गी-झोपडियों में रहने वालों को घर मिल सके ?
उ. दिल्ली मे भाजपा सरकार बनने के बाद इस काम को हम समयबद्ध प्राथमिकता देंगे.
प्र. मैली – यमुना को साफ करने हेतु कई करोड रूपये खर्च हो चुके है पर यमुना आज भी मैली है. इस पर आपकी टिप्पणी क्या है ?
उ. 6500 करोड रूपये खर्च कर दिए पर कांग्रेस आज भी यमुना को साफ नही कर पाई है और कांग्रेस कहती है कि यमुना को साफ करने में अभी पाँच साल और लगेंगे. जैसे मैट्रो चलाने के लिए जापानी कंपनी को दे दिया उसी तरह यमुना की सफाई के लिए भी किसी को दे देते और आज यमुना साफ हो गई होती.
प्र. बीजेपी-घमासन को लेकर मीडिया मे चर्चा थी और चुनाव से कुछ दिनो पहले ही मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा डा. हर्षवर्धन के नाम की गई. स्वाभाविक है कि आपको दुख हुआ होगा. इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है ?
उ. हम संगठन के सिपाही है और संगठन हमारे लिए सर्वोपरि है. संगठन का फैसला सिरोधार्य है. अब अधयक्ष होने के कारण मेरी जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ गई है.   
प्र. क्या नरेन्द्र मोदी – फैक्टर दिल्ली विधान सभा चुनाव - 2013 मे अहम भूमिका निभायेगा ?
उ. बिल्कुल निभायेगा और इस बार हम दिल्ली मे सरकार भी बनायेगे.
    

-          राजीव गुप्ता

राजस्थान चुनाव – श्री गुलाब चन्द कटारिया, नेता प्रतिपक्ष


प्र. मुफ्त दवा योजना, मुफ्त जाँच योजना, सस्ते राशन जैसी कई शुरू की गई योजनाओं को मुद्दा बनाकर इस विधान सभा चुनाव में कांग्रेस कहती है कि हमने प्रदेश में जनता के बीच में जायेंगे परंतु भाजपा के पास इस विधानसभा चुनाव हेतु कोई मुद्दा ही नही है. इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है ?
उ. कांग्रेस के पास कुछ करने का होता तो उसे पूरे पाँच साल मिले. परंतु साढे चार साल तक जो पार्टी सोयी रही, जिसके पास पर्याप्त बजट था, हमने एक लाख 57 करोड का पाँच बजट पास किया परंतु सरकार के विभिन्न विभागों में पैसा पडा रहा. स्कूलों में एक लाख 14 हजार अध्यापकों के पद रिक्त रह जाएँ जिसके कारण सरकारी स्कूल के बच्चों की हुई दुर्गति का अनुभव सरकार को होगा. मुफ्त दवाई बाँटने अच्छी बात है पर दवाई तो तब मिलेगी जब अस्पताल का डाक्टर पर्ची पर दवाई का नाम लिखेगा. आज लगभग 25% - 30% सरकारी चिकित्सक के पद खाली पडे है. ये तो मैने एक उदाहरण दिया. ऐसे कई उदाहरण राजस्थान में आपको मिल जायेंगे. अब स्वयं आप ही सरकार के दावों का अन्दाज़ा लगा सकते है.
प्र. तो क्या यह मान लिया जाय कि गहलोत सरकार की ये सभी योजनाएँ महज चुनावी – फायदा लेने हेतु शुरू की गई हैं ?
उ. बिल्कुल. अगर यह सरकार इन योजनाओं को इस विधानसभा चुनाव का मुद्दा बनाकर चुनावी – फायदा नही लेना चाहती तो ये सारी योजनाएँ चार साल पहले ही शुरू कर देती. इनको रोका किसने था.
प्र. इस विधानसभा चुनाव में आपके मुद्दे क्या है ?
उ. इस विधानसभा चुनाव का हमारा मुख्य मुद्दा है – राजस्थान का विकास. सिर्फ मै ही नही बल्कि राजस्थान का जन-जन यह स्वीकार करता है कि राजस्थान का अगर सचमुच में विकास हुआ है तो वह शेखावत जी और वसुन्धरा राजे जी के कार्यकाल में ही हुआ है.
प्र. आपने 9 अक्टूबर की अजमेर-रैली में पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की कई योजनाओं की जमकर तारीफ की उन सभी योजनाओं का राजस्थान के विकास से क्या संबंध है ?
उ. आपको पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शुरू की गई एक योजना को उदाहरण – स्वरूप बताता हूँ.  प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना के कारण ही आज राजस्थान के लगभग 7,700 गाँवो को जोड दिया और उसका सारा पैसा जयपुर से नही दिल्ली के खजाने से दिया. इतना ही नही फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, ब्याज में छूट जैसी योजनाओं का सीधा-सीधा लाभ आज राजस्थान के वासी को मिल रहा है.
प्र. अगर पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना भारत को दी जिसका लाभ राजस्थान को भी मिल रहा है. इसी प्रकार यूपीए सरकार ने भी तो मनरेगा जैसी योजना देश को दी. तो क्या मनरेगा का लाभ राजस्थान को नही मिल रहा है ?
उ. मनरेगा से राजस्थान का विकास कही आपको नजर आया क्या ? मनरेगा के नाम से ऐसी कोई परिसम्पत्ति बनी है क्या जिसने राजस्थान को तरक्की दी हो ? हमने अपने 2008-2009 के बजट में मनरेगा में छ: हजार करोड रूपया खर्च किया और कांग्रेस ने मात्र 1900 करोड रूपये खर्च किया. इतना ही नही हमने लगभग 26 लाख लोगों को 100 दिन की मजदूरी दी है और कांग्रेस ने मात्र एक लाख तीन हजार लोगों को मजदूरी दी है. आप स्वयं आंकलन कर लीजिए. राजस्थान में तो मनरेगा पूरी तरह धराशायी हो गई. इनकी मनरेगा की सारी योजना धरी की धरी रह गई. ये तो अटल जी को एक मौका और मिलता तथा देश की नदियाँ आपस में जुड जाती तो देश की तकदीर बदल जाती.
प्र. इस वर्ष गहलोत जी ने अपने 15 अगस्त के भाषण में अपनी सरकार की उपलब्धियाँ गिनवाते हुए कहा कि – राजस्थान में हमारी सरकार ने पहली बार आई.आई.टी और आई.आई.एम के नये कालेज खुलवाकर एक बहुत बडी उपलब्धि अर्जित की है. गहलोत सरकार की इस उपलब्धि पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है ?
उ. अगर सबसे पहले राज्यस्थान में ही आई.आई.टी और आई.आई.एम के कालेज खुलते तो हम उनकी उपलब्धि मानते. परंतु मेरा यह मानना है कि गहलोत सरकार को देश के परिपेक्ष्य में राज्यस्थाना का ध्यान ही नही है. देश के कई राज्यों में आई.आई.टी और आई.आई.एम के कालेज कई वर्ष पहले ही खुल चुके हैं. उनके चलते हम तो फिसड्डी राज्य बन गये हैं जो कि सबसे अंत में कोई राज्यस्थान का नाम लेता है. इतना ही नही विकास की श्रेणी में हम कभी 12 वें पायदान पर थे आज 16 वें पायदान पर चले गये है. हमारे समय में विकास दर 8.02 थी आज विकास दर 4.2 आ गई है. किसी भी राज्य की विकास दर ही उसके विकास का आधार होती है. जिस राज्य की विकास दर आधी हो जाय और आप कहें कि राज्य का विकास हुआ है तो आप ही आंकलन लगा लीजिए कि इस सरकार ने राजस्थान का क्या विकास किया है ?  
प्र. यह सरकार रिफाईनरी – मुद्दा भुनाने की भरपूर कोशिश कर रही है. आपकी क्या प्रतिक्रिया है ?
उ. गहलोत सरकार सबसे ज्यादा असफल इस रिफाईनरी – मुद्दे पर ही हुई है. केन्द्र और राज्य में सरकार इनकी ही है. परंतु इन्होने जो काम अपने अंतिम समय में किया, अंतिम समय इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि रिफाईनरी का काम तो शुरू होगा नही. अगर यही काम ये चार साल पहले करते तो अब तक रिफाईनरी का काम भी शुरू हो गया होता और उसका लाभ भी राजस्थान को मिलता. इतना ही नही अगर आप एम.ओ.यू पढेंगे तो आपको पता चल जायेगा कि लगभग 37,000 करोड रुपया हमें चुकाना है. शेयर तो हमारा 26% है और इतने पैसे में अगर राजस्थान खुद चाहता तो अपनी रिफाईनरी लगा सकता है.
प्र. राजस्थान में यात्राओं को लेकर एक नया प्रयोग शुरू किया गया. एक तरफ कांग्रेस ने अपनी यात्रा निकाली तो दूसरी तरफ भाजपा ने भी अपनी यात्रा निकाली. आपकी यात्रा के समापन में प्रधानमंत्री के उम्मीदवार श्री नरेन्द्रमोदी जी आए जिसमें लाखो लोगो की भीड भी जुटी. आपको आपकी यात्रा का लाभ इस विधानसभा चुनाव में मिलेगा, इस पर आपका क्या मंतव्य है ?
उ. कांग्रेस ने जो यात्रा निकाली वह एक सरकारी यात्रा व सरकारी कार्यक्रम थे, जिसमें सरकारी पैसा ही लगा. राज्य में आचार संहिता लगने के बाद कांग्रेस जो अब कार्यक्रम करेगी तो उन्हे खुद ही अपनी थाह मिल जायेगी.  परंतु हमारी यात्रा को जो जन-समर्थन जो मिला उसे मै ही नही पूरा राजस्थान जानता है.
प्र. राजस्थान कांग्रेस के भ्रष्टाचारों को उजागर करने हेतु राजस्थान भाजपा ने एक ब्लैक पेपर निकाला है. कृपया इस ब्लैक पेपर के बारें समझाएँ.
उ. गाँधी परिवार के दामाद श्री राबर्ट वाडेरा को राजस्थान सरकार ने किसानो की 10,000 हेक्टेयर जमीन कौडियों के मूल्य पर दिलवाई जबकि राजस्थान सरकार को पता था कि यहाँ सौर ऊर्जा का एक हब बनने वाला है. लेकिन वाडेरा को बुलाया और करोडों रूपया बिना ब्याज के दिए. उसी जमीन को सरकार की पावर-प्रोजेक्ट बनाने की घोषणा के साथ वाडेरा उसी जमीन को ऊँचे दाम पर बेचकर सैकडो करोड रूपये कमाकर चला गया. अब ये बेईमानी नही तो और क्या है. गरीब किसान ने 34,000 रूपये में किसान ने अपनी जो जमीन बेची आपकी सौर ऊर्जा-हब बनाने की घोषणा के साथ उस जमीन की कीमत के रूप में उसे 20,00,000 रूपये मिलते. कम से कम उस गरीब किसान को ही कमा लेने देते और उसकी गरीबी तो दूर होती.
प्र. राजस्थान सरकार ने स्कूली बच्चो को स्कूटी, लैपटाप बाँटे. आपको क्या लगता है कि गहलोत सरकार को इस चुनाव में इसका कुछ लाभ मिलेगा ?
उ. बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए यह एक अच्छी बात है. लेकिन जो लैपटाप आपने बाँटे है उन्हे चलाने के लिए जो सुविधाएँ चाहिये वे सुविधाएँ आपके स्कूलों में है क्या ? आपने 8वीं कक्षा के बच्चों को लैपटाप दिया है. राजस्थान में 8वीं कक्षा तक के लगभग 35,000 स्कूल हैं. अब सवाल यह है कि इन बच्चों के घरों में लैपटाप चलाने के लिये बिजली का कनेक्शन है क्या ?
प्र. गहलोत जी अपने और अपने सुपुत्र पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज करते हुए कहते है कि अगर आपके पास सबूत है तो साबित करके दिखाईये ?
उ. साबित तो मैने स्वयं विधानसभा में ही कर दिया था. अपने ही भाई-भतीजों को जोधपुर में जो खानों का आबंटन किया, इस प्रश्न को जब मैने विधानसभा में उठाया तो गहलोत जी ने स्वयं कहा कि – गुलाब यह जाँच मैं आपको ही देता हूँ. आप जोधपुर की खानों के आबंटन की सारी फाईलें देख लीजिए और अगर आपको कोई अनियमित्ता दिखे तो सदन को सूचित कीजिए. मैने उन फाईलों को देखा. तत्पश्चात मैने कहा कि जिस बैठक में कानून में परिवर्तन कर पाँच हेक्टेयर को एक हेक्टेयर किया गया. इतना ही नही एक विशेष क्षेत्र को शामिल कर एक नया कानून बनाया गया कि – इस क्षेत्र में जिसकी यूनिट होगी उसे ही यह खान दी जायेगी उस बैठक की अध्यक्षता तो आपने ही की थी. जब इस तथ्य को मैने विधानसभा अध्यक्ष के सामने जब रखा तो गहलोत जी ने अपनी गलती मानते हुए सदन के अंतिम दिन में उन सारी घोषणाओं को निरस्त कर दिया.
प्र. क्या भाजपा राजस्थान के मंत्रियों के चरित्र को लेकर भी जनता के सामने जायेगी ?
उ. यह विषय अपने आप में शर्मिन्दगी का विषय है. चरित्रहीनता के चलते ही आज राजस्थान के कई मंत्री जेल पहुँच चुके है. बावजूद इसके राज्य का मुख्यमंत्री अगर यह कहता है कि – मुझे कोई फर्क नही पडता. अब इससे अधिक चरित्रहीनता की पराकाष्ठा और हो नही सकती.
प्र. पिछ्ली विधानसभा चुनाव में आपको लगभग 34% वोट मिले थे और कांग्रेस को लगभग 36% वोट मिले थे. इस बार आपको कितने प्रतिशत वोट मिलने की संभावना है ?
उ. मेरा आंकलन यह कहता है कि इस बार हमें लगभग 40% वोट मिलेगे. उसका मुख्य कारण है – इस सरकार की नाकामी, स्कूल में अध्यापकों के पद और अस्पतालों में डाक्टरों के पद खाली है, गाँवों तक बिजली पहुँची ही नही है, सडके बनाने का पैसा है पर सडके बनी ही नही है, लचर कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी का बढना, लोगों की न्यूनतम आवश्यक्ताओं का पूरा न होना.
प्र. नरेन्द्र मोदी की जयपुर रैली और प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी की घोषणा से राजस्थान की भाजपा को क्या कुछ फायदा मिलेगा ?
उ. नरेन्द्र मोदी का नाम प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा होने के साथ युवाओं की पसन्द में एकदम से उछाल आया है. पडोसी राज्य का लोकप्रिय, बेदाग छवि और प्रशासक-कुशलता का मुख्यमंत्री होने के कारण अकेले राजस्थान में ही लगभग 2-3% तक वोट प्रतिशत बढेगा.
प्र. राजस्थान से लगभग ढाई वर्ष दूर रहने वाली वसुन्धरा राजे जी पर भी श्री ललित मोदी के साथ मिलकर पैसा बनाने का आरोप कांग्रेस लगा रही है ? इस पर आपकी क्या टिप्पणी है ?
उ. आपके पास पूरे पाँच साल थे. अगर कुछ ऐसी आशंका आपको थी तो शुरू में जाँच कर उनपर आरोप सिद्ध कर देते. परंतु तब आपने किया नही क्योंकि आपके पास कुछ तथ्य तो था नही. अब आपके बोलने से क्या लाभ ? जनता इस बात को भलीभाँति जानती है.

- राजीव गुप्ता                                   .

बुधवार, 2 अक्तूबर 2013

अयोध्या - सीबीआई जाँच


6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में जब तीन गुंबद वाला ढाँचा गिर गया तो उस दिन सायंकाल अयोध्या पुलिस थाने में दो रिपोर्ट लिखी गई।
1.            ढाँचे के समीप ड्युटी पर तैनात पुलिस इंस्पेक्टर ने एक एफआईआर लिखवाई जिसमें पुलिस इंस्पेक्टर ने लिखवाया कि‘’लाखों कारसेवक ढाँचे पर चढ गये और उन्होने ढाँचे को गिरा दिया पर मैं किसी को पहचानता नही.’’
2.            साधु-महात्माओं व अन्य लोगों के लिए सम्बोधन करने हेतु बनाये गये मंच के समीप तैनात पुलिस अधिकारी ने दूसरी एफआईआर लिखवाई जिसमें उन्होने लिखवाया कि लालकृष्ण आडवाणीमुरली मनोहर जोशीविनय कटियारविष्णुहरि डालमियाअशोक सिंघलआचार्य गिरिराज किशोरसाध्वी ऋतम्बराउमा भारतीइन आठ लोगो को मैं पहचानता हूँ जिनके भाषण को सुनकर कारसेवक ढाँचे पर चढ गये और ढाँचा गिरा दिया।
                रिपोर्ट में नामजद सभी लोगों को पकडकर माता टीला में बन्द कर दिया गया। सभी लोग जमानत अथवा मुचलकों पर छोड़ दिए गए। प्रारंभ मे नामजद रिपोर्ट के आधार पर माता टीला की कोर्ट में मुकदमा चला। कालांतर में वही मुकदमा उत्तरप्रदेश की रायबरेली जिले की कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। आज भी वह मुकदमा रायबरेली जिले की उसी कोर्ट में चल रहा है। दोनो एफआईआर को क्रमशः 197 और 198 अलग-अलग नम्बर दिए गए। बाद में पत्रकारोंफोटो कैमरामैन द्वारा 47 एफआईआर और लिखवाई गई। इस प्रकार कुल 49 एफआईआर लिखवाई गई। उत्तरप्रदेश सरकार ने ये सभी 49 एफआईआर सीबीआई को जाँच हेतु सौंप दी। इसके अतिरिक्त 5 या7 एफआईआर अयोध्या के स्थानीय मुस्लिमों द्वारा और लिखवाई गई और उनका मुकदमा फैजाबाद जिले की कोर्ट मे ही चलने लगा।
                प्रारंभ में सीबीआई ने 40 लोगों के खिलाफ अपना आरोप-पत्र सीबीआई की विशेष अदालत को दिया और अदालत से अनुमति मांगी कि हमारी जाँच अभी अधूरी हैजाँच को जारी रखने हेतु अनुमति दी जाय और हम एक संपूरक प्रति (सप्लीमेंट्री कापी) और दायर करेंगे।’’ सीबीआई विशेष अदालत ने सीबीआई को अनुमति दी। कालांतर में सीबीआई द्वारा 9 अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट और दायर की गई। सीबीआई द्वारा 49 लोगो के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। इस प्रकार 49 ही मुल्जिम और 49 ही एफआईआर हो गई।
                इन सभी मुकदमों में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात गौर करने की है कि ‘6 दिसबंर की इस घटना में सैंकड़ो लोगो को चोटें लगीघायल हुए. उन्हे अयोध्या अथवा फैजाबाद के अस्पताल में भर्ती करवाया गयाबाद में कुछ घायलों को अयोध्या से फैजाबाद के जिला-अस्पताल और लखनऊ के अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। पुलिस ने चोट खाए अस्पताल में भर्ती ऐसे किसी को भी मुल्जिम नही बनाया.। अनेक लोगों के यहाँ छापे पडे. परंतु जिनके यहाँ छापे पडेउनमें से भी कोई व्यक्ति सीबीआई आरोप पत्र में मुल्जिम नही है। यहाँ यह ध्यान देने योग्य है कि जो घायल हुए वे सभी गुंबद के समीप ही थे परंतु पुलिस ने उन्हे मुल्जिम न बनाकर मुल्जिम उन्हे बनाया जो मंच पर थे अथवा अपने घर पर लौटकर अपने मोहल्ले अथवा कस्बे मे अपना प्रभाव दिखाने के लिए अपनी बहादुरी का बखान कर कोई वक्तव्य दिए थे। वे वहाँ थे अथवा नही थे इसकी भी कोई पुष्टि नही की गई। अनेक संत-महात्माओं को ढाँचे के समीप दिखाकर मुल्जिम बनाया दिया गया जो मंच के नीचे कभी उतरे ही नही। सैंकड़ों रामभक्तों के घर छापेमारी हुई परन्तु कहीं कुछ नहीं मिलाजिनके यहाँ छापेमारी कीउन्हें भी न मुल्जिम बनाया और न ही मुल्जिमों के विरुद्ध गवाह बनाया। छापेमारी में कुछ भी नहीं मिला परन्तु डकैती की धारा सीबीआई ने अनेकों पर लगाई। यह एक ऐसा विचित्र मुकदमा है।
                दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि  हिन्दुओं के खिलाफ अयोध्या के स्थानीय मुस्लिमों के जो मुकदमे फैजाबाद की जिला न्यायालय में चले थेउन सभी मुकदमों का अंतिम निपटारा जिला अदालत द्वारा किया जा चुका है। उन सभी मुकदमों में कोई हिन्दु दोषी नही पाया गया है. मुसलमानों द्वारा लिखवाये गये सभी मुकदमें अब समाप्त हो गए है.
                सीबीआई को मुकदमा चलाने हेतु प्रदेश सरकार से विशेष अनुमति लेनी पडती है। 1992 में ढाँचा गिरने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार केन्द्र के द्वारा बर्खास्त कर दी गई थी और राज्यपाल का शासन था। अतः सीबीआई का प्रार्थना पत्र राज्यपाल के पास पहुँचा। लाखों कारसेवकों के खिलाफ लिखाई गई रिपोर्ट नम्बर 197 की जाँच व मुकदमा चलाने की अनुमति सरकार से सीबीआई को मिल गई। परंतु जब मुकदमा चला तो सीबीआई ने मंच वाले पुलिस अधिकारी की एफआईआर 198 का मुकदमा भी चालू कर दिया। मुकदमे की प्रारम्भिक सुनवाई में ही बचाव पक्ष के वकीलों ने रिपोर्ट 198 की सुनवाई का विरोध किया परन्तु अनसुना कर दिया गया। 49 लोगो के विरुद्ध सीबीआई की विशेष अदालत में कार्यवाही शुरू हो गई। अदालत ने इन सभी 49 लोगों पर सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोपों को स्वीकार कर लिया और सभी व्यक्तियों को इस सम्बन्ध में अदालत में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी कर दिए गए ताकि वे स्वयं अदालत में उपस्थित होकर अपने विरुद्ध लगाए गए आरोपों को स्वीकार अथवा अस्वीकार कर सकें। इसी आधार पर मुकदमा आगे प्रारम्भ होता।
                बचाव पक्ष ने सीबीआई की विशेष अदालत के इस फैसले के विरुद्ध लखनऊ उच्च न्यायालय में अपील दायर कर दी और तर्क दिया कि सीबीआई को रिपोर्ट क्रमांक 198 की जाँच अथवा मुकदमा चलाने का कानूनी अधिकार नहीं था। लखनऊ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने सुनवाई करते हुए मौखिक टिप्पणी की कि इस केस में बडे प्रभावी लोग शामिल हैं अतः मैं स्टे-आर्डर नही दूँगा अपितु मुकदमें का अन्तिम निपटारा करुंगा। एक बार अगर स्टे आर्डर जारी हो गया तो पता नही इस केस के निपटारे में कितने वर्ष लग जायेंगे। बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क रखा कि सीबीआई को एफआईआर 198 के सम्बन्ध में कोई कार्यवाही करने का अधिकार सरकार ने नहीं दिया अतः सीबीआई विशेष अदालत का निर्णय गलत है। सीबीआई को तो लाखो कारसेवको के खिलाफ ही जाँच करने का अधिकार-पत्र दिया गया था। सारे दस्तावेज अदालत के सम्मुख प्रस्तुत किए गए. अदालत ने बचाव पक्ष के वकीलों के तर्को व तथ्यों को मानते हुए कहा कि सीबीआई की विशेष अदालत को दोनो ही एफआईआर को सुनने का कोई अधिकार नही है। अतः विशेष अदालत यह निर्णय करे कि कुल 49 नामित मुल्जिमों में से कौन 197 के अन्तर्गत और कौन 198 के अन्तर्गत आते हैं तथा केवल 197 नम्बर रिपोर्ट के अन्तर्गत आने वाले मुल्जिमों के विरुद्ध अपनी कार्यवाही जारी रखे। लेकिन न्यायाधीश ने अपने निर्णय में यह भी लिखा कि अगर उत्तरप्रदेश सरकार चाहे तो एक दूसरा आदेश जारी कर अपनी पुरानी गलती को सुधार कर सकती है।
                सीबीआई की विशेष अदालत में एफआईआर 197 तथा 198 के अंतर्गत कौन-कौन मुल्जिम आते हैको लेकर तर्क-वितर्क शुरू हो गए। सीबीआई की विशेष अदालत ने 28 लोगो की एक सूची जारी कर कहा कि ये सभी एफआईआर 197 के अंतर्गत आयेंगे और 21लोगो की दूसरी सूची जारी कर कहा कि ये सभी एफआईआर 198 के अंतर्गत आयेंगे। अर्थात 21 लोगो को नामजद रिपोर्ट की श्रेणी मे ही डाल दिया गया।
                एफआईआर 197 के अंतर्गत नामित 28 लोगो के खिलाफ सीबीआई की विशेष अदालत में मुकदमा आगे चलने लगा और एफआईआर 198 के अंतर्गत 21 लोगो के खिलाफ मुकदमों की सुनवाई सीबीआई की विशेष अदालत ने बंद कर दी। इस प्रकार इस मुकदमें के दो हिस्से हो गये।
                माताटीला मे जो 8 लोग बन्द थेउनकी सारी फाईलें रायबरेली-अदालत मे पहले से मौजूद थी अतः सीबीआई ने रायबरेली में उनके विरुद्ध कार्यवाही तत्काल शुरू करवा दी। अब इस मुकदमें में एक पेंच और आ गया कि एफआईआर 198 के 21 लोगों में 8 लोगों के खिलाफ ही रायबरेली अदालत में मुकदमा प्रारम्भ हुआबाकि बचे हुए 13 लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने को लेकर रायबरेली अदालत ने कहा कि हमारे पास इन 13 लोगों के खिलाफ कोई फाईल नही है और सीबीआई की विशेष अदालत ने कहा कि इन्हे सुनने का अधिकार हमारे पास भी नही है। उत्तरप्रदेश सरकार ने भी अपनी इस पुरानी भूल को सुधारने से इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में भी यह विषय आया था परंतु सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह उत्तरप्रदेश सरकार का मामला है. लेकिन उत्तरप्रदेश सरकार ने कहा था कि हम इस मामले में कोई हस्तक्षेप नही करेंगे। 28 लोगों का मुकदमा सीबीआई की विशेष अदालत में और 8 लोगों का मुकदमा रायबरेली अदालत में चल रहा है. परंतु रिपोर्ट 198 के अन्तर्गत शेष बचे 13 लोगों का मुकदमा कहाँ चले इस पर अभी तक कोई फैसला नही हुआ है। इस प्रकार ये मुकदमे 3 हिस्सों में बँट गया।
                सीबीआई चाहती थी कि सभी 49 लोगों के खिलाफ विशेष अदालत में मुकदमा चले परन्तु सीबीआई की ही गलती से मुकदमा तीन हिस्सों में बंट गया। सीबीआई ने एक मुस्लिम नागरिक को सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने के लिए तैयार कर लिया। मुस्लिम नागरिक ने याचिका दायर कर मुकदमों की सुनवाई विशेष अदालत में सम्मिलित रूप में करवाने की मांग की। किसी दूसरे मुस्लिम वजाहत अन्सारी ने भी इसी प्रकार की याचिका सर्वोच्च न्यायालय में डाल दी। सर्वोच्च न्यायालय ने कालान्तर में दोनों याचिका रद्द कर दीं।
                अब सीबीआई ने स्वयं लखनऊ-उच्च न्यायालय में सभी मुकदमों को एक साथ चलाए जाने की याचिका दायर कर दी। सुनवाई दस वर्ष तक हुई। अन्ततः लखनऊ उच्च न्यायालय ने भी सीबीआई की याचिका रद्द कर दी। उच्च न्यायालय के इसी आदेश के विरुद्ध अब सीबीआई सर्वोच्च न्यायालय में अपील लेकर आई है। अपील 90 दिन में दायर होनी चाहिए थी परन्तु सीबीआई 170 दिन बाद अपील लेकर आई। अब सर्वोच्च न्यायालय को फैसला करना है कि निर्धारित अवधि के बाद दायर की गई अपील पर ध्यान दे या न दे।
                माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इसी अपील को सुनने के लिए दिसम्बर, 2013 की तारीख निर्धारित की थीअभियोजन पक्ष ने सुनवाई जल्दी करने का निवेदन किया। बचाव पक्ष ने कोई विरोध नहीं कियाकोई आवश्यक भी नहीं है। परिणामस्वरूप अदालत ने अक्टूबर में सुनवाई करने का आदेश कर दिया। यह जानना आवश्यक है कि आखिर सीबीआई मुकदमों को इकट्ठा क्यों करना चाहती है?

-          चम्पत राय जी से राजीव गुप्ता की बातचीत पर आधारित