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मंगलवार, 25 सितंबर 2012

चारधाम और देश की अखंडता



आद्य शंकराचार्य भारतवर्ष की एक दिव्य विभूति है. उनकी प्रभा आज भी दिग्दिगन्त को आलोकित कर रही है. शंकराचार्य का जन्म दक्षिण भारत के केरल में अवस्थित निम्बूदरीपाद ब्राह्मणों के 'कालडी़ ग्राम' में 788 ई. में हुआ , फिर भी उनकी कीर्ति कौमुदी उसी प्रकार अक्षुण्ण रूप में आज भी भारत के नभोमंडल को उद्भासित कर रही है.   जिस समय यह पवित्र भारत - वर्ष छिन्नता के पंक में धंसा जा रहा था , जब अनाचारी  राक्षस इसे चारों ओर् से घेरे हुए थे , जब एक छोर से दूसरे छोर तक यह सारा देश आलस्य और अकर्मण्यता के चंगुल में फँसा हुआ था , तब आचार्य शंकर का मंगलमय उदय इस देश में हुआ और आचार्य शंकर ने भारत को अखंड बनाये रखने के लिये भारतवर्ष के चारों कोनो में (पूर्व में जगन्नाथ पुरी,  पश्चिम में द्वारका, उत्तर में बद्रीनाथ , दक्षिण में रामेश्वरम ) एक - एक धाम की स्थापना की.  चार -धाम की स्थापना के पीछे उनका यही उदेश्य रहा होगा कि भारत का हर व्यक्ति जब भारत के अन्य भागो में जायेगा तो वह "भारत से अलग होने की कल्पना तक नहीं करेगा" अपितु उसका भारत से प्रेम और अधिक प्रगाढ़ होगा तथा साथ ही उसे भारत के बारे में और अधिक जानने का सुअवसर प्राप्त होगा. उनके इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए और वर्तमान की विषम परिस्थितियों जैसे नक्सलवाद,क्षेत्रवाद इत्यादि जैसी गंभीर आतंरिक समस्याओ को देखते हुए मेरे मानस में एक विचार कौंधा कि "क्यों ना भारत-सरकार द्वारा एक देश की एकता और अखंडता को बचाए रखने हेतु भारतवासियों के लिए "चार-धाम-यात्रा" हेतु रेल-तंत्र की सुव्यवस्था करते हुए "एक विशेष रेलगाड़ी" चलायी जाय जिससे राष्ट्रीय एकता-अखंडता को और बल मिलेगा क्योंकि भारतीय संविधान में भी राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने की बात कही गयी है. इससे भारतीय-पर्यटन एवं तीर्थाटन को भी बढ़ावा मिलेगा जिससे सम्बंधित स्थान की अर्थव्यस्था भी आमूलचूल परिवर्तन के साथ तेजी से आगे बढ़ेगी परिणामतः लाखो लोगो को रोजगार का सुअवसर भी प्राप्त होगा और साथ ही लोगों को भारत की विभिन्नता में एकता कही जाने वाली भारतीय संस्कृति को जानने और समझने का सुअवसर भी प्राप्त होगा कि इतनी भाषा, रीति-रिवाज, व्यवहार, समाज, जलवायु इत्यादि विविधताओ के बावजूद भारतीय संस्कृति एक है तथा जो भारतीय आर्थिक रूप से कमजोर हो उनका सारा खर्च भारत-सरकार वहन करे. आप सबके सुझाव,मार्गदर्शन और आशीर्वाद का सदैव आकांक्षी !


आपका 
राजीव गुप्ता

2 टिप्‍पणियां:

Lalit ने कहा…

Keep it up

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

देश को एक सूत्र में बाटने का बहुत ही महान कार्य किया शंकराचार्य ने।