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सोमवार, 9 जनवरी 2012

उत्तरप्रदेश : जनता अभी मौन है




 समूचे उत्तर भारत में कड़ाके की ठण्ड पड़ रही है जिसकी चपेट में कई लोग काल के शिकार भी हो गएँ हैं परन्तु उत्तरप्रदेश के चुनावी वातावरण में कुदरत के कहर का भी कोई जोर नहीं चल पा रहा है ! हर तरफ विभिन्न पार्टियों के राजनेता ताबड़तोड़ रैलियां कर समूचे उत्तरप्रदेश के वातावरण को गर्म किये हुए है ! हर रैली में "बेचारा आम जन" यह आस लेकर आता है कि कोई उसके हित की बात करे उसके विकास की बात करे परन्तु "तथाकथित राजनेताओं" के बीच एक दूसरे की पार्टी पर कीचड उछालते हुए यह दिखाने की होड़ लगी हुई है कि "मेरी चादर उसकी चादर से ज्यादा उजली है" !  पर वास्तविकता यह है राजनीति के हमाम में सब नंगे है ! दल-बदल के कारण राजनेताओं के बीच ऐसा उछल-कूद का खेल चल रहा है कि "किस पार्टी का नेता कब उछल कर आएगा और कब कूद कर चला जायेगा" यह कहना बहुत मुश्किल है ! दल-बदल का ऐसा "नंगा नाच" अगर कोई "विश्व रिकॉर्ड" भी बना दे तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए !   

मसलन "कुशवाहा" की सदस्यता भले ही स्थगित कर दी गयी हो परन्तु अवधेश वर्मा पंचायत चुनाव में अपने परिवार के लोगों को जिताने के लिए विरोधियों का अपहरण तक करवाया थाजिसे उस समय बीजेपी ने खूब भुनाया था और  उनके खिलाफ आंदोलन करते हुए यह कहा था कि यूपी में "कानून-राज" खत्म हो गया हैअब उन्ही अवधेश वर्मा के सहारे "राम-राज" लाने की कसमें खा रही है ! बादशाह सिंह और दद्दन मिश्र की "कार - गुजारियों" पर भी पानी डाल कर इन्हें  अब भाजपा पार्टी का उम्मीदवार बना दिया गया हैं ! ऐसा कर भाजपा सिर्फ राजनीतिक शतरंज के "प्यादे" मात्र से संतोष कर रही है असली खेल तो दूसरी पार्टियाँ खेल रही हैं ! फैजाबाद के "शशि -कांड "को कैसा भूला जा सकता है जिस समाजवादी पार्टी ने संसद से लेकर सड़क तक हंगामा मचाकर तत्कालीन गृह राज्यमंत्री "आनंद सेन" से इस्तीफ़ा लेकर उन्हें जेल भिजवाया जहां उन्हें उम्रकैद की सजा मिली उन्ही "आनंद सेन" के पिता "मित्रसेन यादव" जिन पर "कबूतरबाजी" के भी आरोप लगते रहें है सपा पार्टी के उम्मीदवार हैं ! एक छात्रा को किडनैप और रेप के आरोप में डिबाई से बीएसपी विधायक "भगवान शंकर शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित" जेल तक की सैर कर चुके हैं परन्तु  गुड्डू पंडित अब समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार हैं ! पैगंबर का कार्टून बनाने वाले कार्टूनिस्ट का सिर कलम करने पर इनाम की घोषणा करने वाले "हाजी याकूब कुरैशी" को सिखों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने के बाद बीएसपी ने अपनी पार्टी से निकाल दिया था परन्तु आरएलडी ने उनके साथ - साथ मुजफ्फरनगर में दिल्ली की लड़कियों की किडनैपिंग और छेड़छाड़ के आरोपी बीएसपी विधायक "शाहनवाज राणा" को भी अपनी पार्टी बाहें फैला कर स्वागत किया ! वही आरएलडी की महासचिव और पूर्व मंत्री "अनुराधा चौधरी" समाजवादी पार्टी में शामिल हुई जिससे समाजवादी पार्टी के हौसले बुलंद हो गए ! 

इस दल-बदल की "सड़ांध राजनीति" में असली मुद्दा "प्रदेश और जनता का विकास" कही खो गया है ! आम - जनता के हित और उनके विकास की वकालत कर वर्तमान मुख्यमंत्री के ऊपर कोई "शाम की दवाई महंगी" का आरोप लगा कर मतदाता को लुभाने की कोशिश में  जुटा है तो किसी विशेष समुदाय को "नौ  प्रतिशत आरक्षण" ( अभी हाल ही में सोनिया नेतृत्व  यूपीए- २ ने यह निर्णय लिया है कि मुसलमानों को उनके मजहब के आधार पर नौकरियों में साढ़े चार प्रतिशत का आरक्षण पिछड़ों के हक मार कर दिया जायेगा )  की बात कर उनका दिल जीतने को बेताब है ! कोई "भगवान् राम" को बेचने का आरोप लगाकर "विवादित ढांचा" को हवा देने की फ़िराक में है तो कोई " संवैधानिक संस्था - निर्वाचन आयोग" के फैसले को कोर्ट में चुनौती देकर आम जनता से भावनात्मक रूप से जुड़ने की कवायद में जुटा है ! कोई भ्रष्ट नेता को अपनी पार्टी में "नहीं" लेकर अपने को पाक-साफ़ दिखाने की कोशिश में जुटा है तो कोई "जादुई हाथी पर पैसे खाने" का आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने की कवायद में लगा है ! 

वर्तमान के चुनावी दंगल को देख कर ऐसा लगता ही नहीं कि इस राज्य ने देश को नेतृत्व अटल बिहारी वाजपेयी , राजीव गांधीइंदिरा गांधी और जवाहर लाल नेहरु के रूप में दिया है !  वैसे उत्तरप्रदेश की राजनीति राजनेताओं के लिए हमेशा एक प्रयोगशाला के रूप में रही है ! मसलन कांग्रेस को टक्कर देने के लिए कभी "भारतीय जनसंघ और सोशलिस्ट पार्टी" हुआ करती थींपरन्तु कांग्रेस को पंद्रह साल डिगा नहीं पाई ! पासा १९६७ में पलटा जब चौधरी चरण सिंह ने गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई ! और ठीक दस वर्ष पश्चात एक राजनेता को जनता ने जबाब देने के लिए १९७७ में आपातकालीन के बाद देश व प्रदेश में "जनता पार्टी" की सरकार बनवा दी ! परन्तु उत्तरप्रदेश की राजनीति में असली मोड़ १९८९ में आया जब "राममंदिर - आन्दोलन " का मुद्दा पूरे भारत में जोर पकड़ा ( जिसे बाद में १९९१ में "रामलहर" के रूप में भी जाना गया ! )जिसे दबाने के लिए वीपी सिंह ने "मंडल कमीशन" का कार्ड चला तो उससे निपटने के लिए लाल कृष्ण आडवाणी ने "राम - रथयात्रा" निकली ! इन सबके बीच एक ऐसा तबका था जो खामोश होकर अपने उत्थान का सपना देख रहा था ! वह तबका था "दलित उत्थान" काजिसे बसपा पार्टी के संस्थापक "कांशीराम" नेतृत्व प्रदान कर रहे थे ! १९८९ के विधान सभा में इस पार्टी के १३ विधायक जीत कर आये ! 

१९९२ में विवादित ढांचा गिरने के बाद जब भाजपा की आंधी को रोक पाना संभव नहीं था तो आज की दो प्रमुख विरोधी पार्टियाँ "सपा और बसपा" ने आपस में गठबंधन कर सरकार बनाई ! पहली बार "दलितों" ने सत्ता का स्वाद लिया ! १९९५ में बसपा ने भाजपा के साथ गठबंधन किया और "मायावती" मुख्यमंत्री बनी इस प्रकार दलितों ने पहली बार अपना "दलित" मुख्यमंत्री पाया ! जिससे "मायावती" को और ताकत मिली परिणामतः २००२ के भाजपा के साथ गठबंधन टूटने के पश्चात  २००७ में बसपा ने सोशल इंजीनियरिंग "दलित-सवर्ण" के आधार पर २०६  का जादुई आंकड़ा पार कर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई ! 

यह उत्तरप्रदेश का दुर्भाग्य है कि इस बार के विधानसभा चुनाव का किसी भी पार्टी के पास "प्रदेश के विकास" का कोई "एजेंडा" नहीं है ! अच्छा होता कि राजनेता बिहार और गुजरात जैसे अनेक राज्यों के विकास - मॉडल का अनुसरण कर "आम जनता और प्रदेश " के "विकास की बात कर एक "स्वस्थ संवाद" स्थापित करते और "मुद्दों के आधार" पर जनता से वोट मांग कर भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की बात करते जिससे भारतीय लोकतंत्र और मजबूत होता ! परन्तु यहाँ भ्रष्टाचार को दूर करने की बात करना भी बेईमानी है क्योंकि चुनाव आयोग द्वारा संज्ञान लेने पर "काले धन की गंगोत्री" पकड कर राजनेताओं को चुनाव में शामिल किये जाने वाले "काले-धन के उपयोग" का ऐसा आइना दिखाया जा रहा है जिसे कभी "बाबा रामदेव" ने रामलीला के मैदान में उठाया था !  जनता सभी राजनैतिक पार्टियों के चाल - चरित्र और चेहरे को बखूबी देख व समझ रही हैं ! अब कुछ लोगों का मानना है कि  २०१२  की उत्तरप्रदेश जीत २०१४  की लोकसभा की स्तिथि तय करेगी जिसने उत्तरप्रदेश में सरकार बनायीं २०१४  की लोकसभा की चाबी उसी दल के हाथ में होगी  दल-बदल से लेकर एक-दूसरे पर कीचड उछालने के बाद अब २०१२ में ऊँट किस करवट बैठेगा यह देखना बहुत ही दिलचस्प होगा क्योंकि "जनता अभी मौन" है  !    
                                                      - राजीव गुप्ता ( लेखक )
                                                       

सोमवार, 2 जनवरी 2012

संघ अछूत है क्या ?




यूंपीए - 2 के मंत्रीगण एवं कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्त्ता अपना विवेक खो बैठे हैं परिणामतः बार - बार एक देशभक्त संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  के ऊपर अपने शब्दों के माध्यम से कुठाराघात करते रहते है ! इनकी आखों पर राजनीति की ऐसी परत चढी है कि समाज को बांटने के लिए संघ को कभी "भगवा आतंकवाद" से संबोधित करते है तो कभी "फासिस्ट संगठन" की संज्ञा देते हैं ! कांग्रेस के नेता हिटलर के प्रचार मंत्री गोयबेल्स के दोनों सिद्धांतो पर चलते है ! मसलन एक – किसी भी झूठ को सौ बार बोलने से वह सच हो जाता है ! दो – यदि झूठ ही बोलना हैतो सौ गुना बड़ा बोलो ! इससे सबको लगेगा कि बात भले ही पूरी सच न होपर कुछ है जरूर !  इसी सिद्धांतों पर चलते हुए कांग्रेसी हर उस व्यक्ति की आड़ में संघ को बदनाम करने कोशिश करते है जो देशहित की बात करता है ! मसलन कभी अन्ना हजारे जी की ओट में  संघ पर हमला करते है तो कभी बाबा रामदेव और श्री श्री रविशंकर जी की ओट में संघ पर तीखा प्रहार करने से भी नहीं गुरेज करते ! अन्ना जी की अगुवाई में भ्रष्टाचार के खिलाफ देश में बने जनमानस की हवा निकालने के लिए सरकार बार - बार संघ का हाथ होने का दावा करती है ! कभी किसी चित्र का हवाला देती है तो कभी संघ के किसी कार्यक्रम में अन्ना जी की उपस्थिति का पोस्टमार्टम  करती है ! इसकी आड़ में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लपेटने के चक्कर में हैंजिसकी देशभक्ति तथा सेवा भावना पर विरोधी भी संदेह नहीं करते ! भारत में स्वाधीनता के बाद भी अंग्रेजी कानून और उसकी मानसिकता बदस्तूर जारी है !  इसीलिए कांग्रेसी नेता आतंकवाद को मजहबों में बांटकर इस्लामीईसाई आतंकवाद के सामने ‘भगवा आतंक’ का शिगूफा कांग्रेसी नेता छेड़ कर देश की जनता को भ्रमित करने नाकाम कोशिश करते है ! 
    

जो सभ्यता पूरे विश्व के कल्याण का उदघोष करती हो और उस सभ्यता का जोरदार समर्थन करने वाले लोगों को बदनाम करने की साजिश वर्तमान सरकार की नियत को दर्शाता है !  भारतीय चिंतन में ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:’ की भावना और भोजन से पूर्व जीव-जंतुओं के लिए भी अंश निकालने का प्रावधान है। ‘अतिथि देवो भव’ का सूत्र तो अब शासन ने भी अपना लिया है ! 
खुद कमाओ खुद खाओ यह प्रकृति है , दूसरा कमाए तुम छीन कर खाओ यह विकृति है और खुद कमाओ दूसरे को खिलाओ यह भारतीय संस्कृति है ! परन्तु तथाकथित वैश्वीकरण अर्थात ग्लोब्लाईजेशन के इस दौर में अपने को अधिक आधुनिक कहलाने की होड़ के चक्कर में व्यक्ति जब अपनी  पहचान,  अपने राष्ट्रीय स्वाभिमानअपने मूल्यों तथा  अपनी संस्कृति से समझौता करने को आतुर हो तो ऐसे विकट समय में अपने देश की ध्वजा-पताका थामे अगर कोई भारत में भारतीयता की बात करता हो तो उसे बदनाम करने के लए तरह - तरह के हथकंडे अपनाये जाते है ! क्या स्वतंत्र भारत में भारतीयता की बात करना गुनाह है ? आज भारत अनेक आतंरिक कलहों से जूझ रहा है ! देश में कही आतंकवाद अपने चरम पर है तो कही पर नक्सलवाद ! बंगलादेशी घुसपैठ सबको विदित ही है ! कृषि - प्रधान कहलाने वाले देश में  कृषक आत्म हत्या को मजबूर हो रहा है !  वनवासियोंझुग्गी-झोपड़ियों अथवा गरीबों की सेवा के नाम पर उन्हें चिकित्सा,शिक्षा  आर्थिक मदद देकर अथवा आतंकवादियों द्वारा प्रायोजित लव-जेहाद ( आतंकवादी हिन्दू लड़कियों को अपने प्रेमजाल में फंसाकर उनसे शादी कर उन्हें मतांतरित करते है और बाद में उन्हें तलाक देकर नए शिकार की तलाश में जुट जाते है ! )  के माध्यम से हजारो बालिकाओं को धर्मांतरण करने पर मजबूर किया जाता है !  

दिल्ली विश्वविद्यालय के स्नातक की पुस्तक में करोडो भारतीयों के इष्ट देवी - देवताओं पर अभद्र टिप्पणियां कर विद्यार्थियों को पढने पर मजबूर किया जाता है ! भारत पर हर तरफ से चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो ,सेवा का क्षेत्र होराजनीति का क्षेत्र होग्रामीण क्षेत्र हो हर तरफ से लगभग भारतीय संस्कृति और सभ्यता पर लगातार हमला हो रहा है ! राजनैतिक पार्टियाँ बस अपने स्वार्थ-पूर्ति में ही लगी रहती है कोई पार्टी जाति के नाम पर वोट मांगती है तो कोई किसी विशेष समुदाय को लाभ पहुचाने के लिए उन्हें कोटे के लोटे से अफीम चटाने का काम करती है ! परन्तु राष्ट्रीयता की बात संघ विचार धारा की पार्टी अर्थात भारतीय जनता पार्टी  को छोड़कर कोई नहीं करता !  हिन्दी भाषा पर तो अंग्रेजी भाषा ने लगभग कब्ज़ा ही कर लिया है ! कोई राज्य "गीता" पर प्रतिबंध लगा देता है तो कोई राष्ट्रीय गीत "वन्देमातरम" के गाने पर विरोध जताता है ! आज भ्रष्टाचार का हर तरफ बोलबाला है परन्तु बावजूद इसके सरकार को इस समस्या से ज्यादा चिंता इस बात की है कि भार्स्त्चार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले के पीछे कही संघ तो नहीं है ! क्या संघ के लोग इस देश के नागरिक नहीं है क्या संघ के लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकते संघ अछूत  है क्या ज्ञातव्य है कि देश के कई राज्यों में इस विचारधारा को मानने वाली राजनैतिक पार्टी अर्थात भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री है !  "बाटों और राज्य करो" की नीति को मानने वाली राजनैतिक पार्टी "कांग्रेस" जिसकी अभी केंद्र में सरकार हैअगर वह संघ के लोगों को देशभक्त नहीं मानती तो संघ पर बैन क्यों नहीं लगा देती !   

किसी प्रसिद्ध चिन्तक ने कहा है  कि जो कौमें अपने पूर्वजों को भुला देती है वो ज्यादा दिन तक नहीं चलती है !  परन्तु राजनेताओं पर राजनीति का ऐसा खुमार चढ़ा है अपनी सस्ती राजनीति चमकाने के चक्कर में देश की अखंडता के साथ खिलवाड़ करने से भी बाज नहीं आते ! जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी दिल्ली में खुले आम देश की अखंडता को चुनौती देकर चले जाते है और किसी के कानो पर जूं तक नहीं रेंगती ! पिछले दिनों अमरीका में ‘कश्मीर अमेरिकन सेंटर’ चलाने वाले डागुलाम नबी फई तथा उसका एक साथी पकड़े गये हैंजो कुख्यात पाकिस्तानी संस्था आई.एस.आई के धन से अवैध रूप से सांसदों एवं अन्य प्रभावी लोगों से मिलकर कश्मीर पर पाकिस्तान के पक्ष को पुष्ट करने का प्रयास (लाबिंग) करते थे ! कश्मीर की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी है ! इस बारे में देश को जागरूक करने के लिए कश्मीर विलय दिवस (26 अक्तूबर) को 2010 में शाखाओं पर तथा सार्वजनिक रूप से लगभग 10,000 कार्यक्रम हुए ! ग्राम्य विकास में लगे कार्यकर्ताओं का सम्मेलन कन्याकुमारी तथा मथुरा में हुआ ! हिन्दू आतंकवाद के नाम पर किये जा रहे षड्यन्त्र के विरोध में 10 नवम्बर, 2010 को देश भर में 750  से अधिक स्थानों पर हुए धरनों में करोड़ों लोगों ने भाग लिया।

 संघ एक अनुशासित तथा शांतिप्रिय संगठन है और उसका काम  "व्यक्ति निर्माण" का है ! संघ को समझने के लिए बहुत दूर जाने की आवश्यकता नहीं होती !  देश भर में हर दिन सुबह-शाम संघ की लगभग 50,000 शाखाएं सार्वजनिक स्थानों पर लगती हैं !  इनमें से किसी में भी जाकर संघ को समझ सकते हैं ! शाखा में प्रारम्भ के 40 मिनट शारीरिक कार्यक्रम होते हैं ! बुजुर्ग लोग आसन करते हैंतो नवयुवक और बालक खेल व व्यायाम ! इसके बाद वे कोई देशभक्तिपूर्ण गीत बोलते हैं ! किसी महामानव के जीवन का कोई प्रसंग स्मरण करते हैं और फिर भगवा ध्वज के सामने पंक्तियों में खड़े होकर भारत माता की वंदना के साथ एक घंटे की शाखा सम्पन्न हो जाती है ! संघ के ऊपर प्रायः आरोप लगता रहा है कि उसने स्वाधीनता संग्राम में भाग नहीं लियाजबकि संघ के संस्थापक डाहेडगेवार ने जंगल सत्याग्रह में भाग लेकर एक साल का सश्रम कारावास वरण किया था ! चूंकि उन दिनों कांग्रेस आजादी के संघर्ष में एक प्रमुख मंच के रूप में काम कर रही थीअतः संघ के हजारों स्वयंसेवक सत्याग्रह कर कांग्रेस के बैनर पर ही जेल गये !  

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शाखा चलाने के अलावा अनेक क्षेत्रों में भी काम करता हैं। निस्वार्थ भाव एवं लगन के कारण ऐसे सब कार्यां ने उस क्षेत्र में अपनी एक अलग व अग्रणी पहचान बनाई है।
संस्कृत भाषा के प्रति जागृति लाने हेतु विभिन्न संस्थाएं प्रयासरत हैं ! पूरी दुनिया को पांच क्षेत्रों (अमरीकायूरोपआस्ट्रेलियाअफ्रीका तथा एशिया) में बांटकरजिन देशों में हिन्दू हैंवहां साप्ताहिकमासिक या उत्सवों में मिलन के माध्यम से काम हो रहा है !  भारत के वनों व पर्वतों में रहने वाले हिन्दुओं को अंग्रेजों ने आदिवासी कहकर शेष हिन्दू समाज से अलग करने का षड्यन्त्र किया !  दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी यही गलत शब्द प्रयोग जारी है ! ये वही वीर लोग हैंजिन्होंने विदेशी मुगलों तथा अंग्रेजों से टक्कर ली हैपर वन-पर्वतों में रहने के कारण वे विकास की धारा से दूर रहे गये ! इनके बीच स्वयंसेवक ‘वनवासी कल्याण आश्रम’ नामक संस्था बनाकर काम करते हैं !  इसकी 29 प्रान्तों में 214 से अधिक इकाइयां हैं ! इनके द्वारा शिक्षाचिकित्साखेलकूद और हस्तशिल्प प्रशिक्षण आदि के काम चलाये जाते हैं ! 
ज्ञातव्य है कि दिल्ली में अभी हाल में ही संपन्न हुए "कॉमनवेल्थ गेम्स - 2010" में  ट्रैक फील्ड में पहला पदक और एसियन गेम्स में. 10,000 मीटर  में सिल्वर पदक 5,000 मीटर में कांस्य पदक  जीतने वाली "कविता राऊत " वनवासी कल्याण आश्रम संस्था से ही निकली हैं ! 

संघ का कार्य केवल पुरुष वर्ग के बीच चलता हैपर उसकी प्रेरणा से महिला वर्ग में ‘राष्ट्र सेविका समिति’ काम करती है ! इस समय देश में उसकी 5,000 से अधिक शाखाएं हैं !  इसके साथ ही समिति 750 सेवाकार्य भी चलाती है ! ‘क्रीड़ा भारती’ निर्धनवनवासी व ग्रामीण क्षेत्र में छिपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाने का प्रयास कर रही है ! धर्मान्तरण के षड्यन्त्रों को विफल करने के लिए धर्म जागरण के प्रयासों के अन्तर्गत 110 से अधिक जाति समूहों में सेवा कार्य प्रारम्भ किया गया है ! सेवा के कार्य में ‘दीनदयाल शोध संस्थान’ भी लगा है ! गोंडा एवं चित्रकूट का प्रकल्प इस नाते उल्लेखनीय है ! राजनीतिक क्षेत्र में ‘भारतीय जनता पार्टी’ की छह राज्यों में अपनी तथा तीन में गठबंधन सरकार है ! समाज के प्रबुद्ध तथा सम्पन्न वर्ग की शक्ति को आरोग्य सम्पन्नआर्थिक रूप से स्वावलम्बी तथा समर्थ भारत के निर्माण में लगाने के लिए ‘भारत विकास परिषद’ काम करती है ! परिषद द्वारा संचालित देशभक्ति समूह गान प्रतियोगिता तथा विकलांग सहायता योजना ने पूरे देश में एक विशेष पहचान बनायी है ! इसके अतिरिक्त परिषद के 1545 से अधिक  सेवा कार्य भी चला रही है ! 1975 के बाद से संघ प्रेरित संगठनों ने सेवा कार्य को प्रमुखता से अपनाया है !  राष्ट्रीय सेवा भारती’ के बैनर के नीचे इस समय लगभग 400 से अधिक  संस्थाएं काम कर रही हैं !  विकलांगों में कार्यरतसक्षम’ नामक संस्था की 102 से अधिक नगरों में बड़े जोर - शोर से  लगी है ! नेत्र सेवा के क्षेत्र में इसका कार्य उल्लेखनीय है ! 

आयुर्वेद तथा अन्य विधाओं के चिकित्सकों को ‘आरोग्य भारती’ के माध्यम से संगठित किया  गया है ! ‘नैशनल मैडिकोज आर्गनाइजेशन’ द्वारा ऐसे ही प्रयास एलोपैथी चिकित्सकों को संगठित कर किये जा रहे हैं ! ‘चाहे जो मजबूरी होमांग हमारी पूरी हो’ के स्थान पर ‘देश के हित में करेंगे कामकाम के लेंगे पूरे दाम’ की अलख जगाने वाले ‘भारतीय मजदूर संघ’ का देश के सभी राज्यों के 550 जिलों में काम है ! अब धीरे-धीरे असंगठित मजदूरों के क्षेत्र में भी कदम बढ़ रहे हैं ! ‘भारतीय किसान संघ’ ने बी.टी बैंगन के विरुद्ध हुई लड़ाई में सफलता पाई ! ‘स्वदेशी जागरण मंच’ का विचार केवल भारत में ही नहींतो विश्व भर में स्वीकार्य होने से विश्व व्यापार संगठन मृत्यु की ओर अग्रसर है ! मंच के प्रयास से खुदरा व्यापार में एक अमरीकी कंपनी का प्रवेश को रोका गया तथा जगन्नाथ मंदिर की भूमि वेदांता वि0विको देने का षड्यन्त्र विफल किया गया ! ग्राहक जागरण को समर्पित ‘ग्राहक पंचायत’ का काम भी 135 से अधिक जिलों में पहुंच गया है ! इसके द्वारा  24 दिसम्बर को ग्राहक दिवस तथा 15 मार्च को क्रय निषेध दिवस के रूप मनाया जाता है ! ‘सहकार भारती’ के 680 से अधिक तहसीलों में 20 लाख से ज्यादा सदस्य हैं !  इसके माध्यम से मांस उद्योग को 30 प्रतिशत सरकारी सहायता बंद करायी गयी !  अब सहकारी क्षेत्र को करमुक्त कराने के प्रयास जारी हैं ! ‘लघु उद्योग भारती’ मध्यम श्रेणी के उद्योगों का संगठन है ! इसकी 26 प्रांतों में 100 से ज्यादा इकाइयां हैं।

शिक्षा क्षेत्र में ‘विद्या भारती’ द्वारा 15,000 से अधिक विद्यालय चलाये जा रहे हैंजिनमें लाखों आचार्य करोड़ों शिक्षार्थियों को पढ़ा रहे हैं ! शिक्षा बचाओ आंदोलन द्वारा पाठ्य पुस्तकों में से वे अंश निकलवाये गयेजिनमें देश एवं धर्म के लिए बलिदान हुए हुतात्माओं के लिए अभद्र विशेषण प्रयोग किये गये थे ! ‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ का 5,604 से अधिक  महाविद्यालयों में काम है !  इसके माध्यम से शिक्षा के व्यापारीकरण के विरुद्ध व्यापक जागरण किया जाता है !भारतीय शिक्षण मंडलशिक्षा में भारतीयता संबंधी विषयों को लाने के लिए प्रयासरत है ! सभी स्तर के 7.5 लाख से अधिक अध्यापकों की सदस्यता वालेशैक्षिक महासंघ’ में लगभग सभी  राज्यों केलगभग विश्वविद्यालयों के शिक्षक जुड़े हैं। स्वामी विवेकानंद के विचारों के प्रसार के लिए कार्यरत ‘विवेकानंद केन्द्रकन्याकुमारी’ ने स्वामी जी की 150 वीं जयन्ती 12 जनवरी, 2013 से एक वर्ष तक भारत जागोविश्व जगाओ अभियान चलाने का निश्चय किया है !  पूर्वोत्तर भारत में इस संस्था के माध्यम से शिक्षा एवं सेवा के विविध प्रकल्प चलाये जाते हैं !  

विश्व हिन्दू परिषद’ जहां एक ओर श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के माध्यम से देश में हिन्दू जागरण की लहर उत्पन्न करने में सफल हुआ हैवहां 36,609 से अधिक सेवा कार्यों के माध्यम से निर्धन एवं निर्बल वर्ग के बीच भी पहुंचा है !  इनमें शिक्षास्वास्थ्यस्वालम्बन तथा सामाजिक समरसता की वृद्धि के कार्य प्रमुख रूप से चलाये जाते हैं ! "एकल विद्यालय" योजना द्वारा साक्षरता के लिए हो रहे प्रयास उल्लेखनीय हैं !  बजरंग दलदुर्गा वाहिनीगोसेवाधर्म प्रसारसंस्कृत प्रचारसत्संगवेद शिक्षामठ-मंदिर सुरक्षा आदि विविध आयामों के माध्यम से परिषद विश्व में हिन्दुओं का अग्रणी संगठन बन गया है ! 

पूर्व सैनिकों की क्षमता का समाज की सेवा में उपयोग होइसके लिए ‘पूर्व सैनिक सेवा परिषद’ तथा सीमाओं के निकटवर्ती क्षेत्रों में सजगता बढ़ाने के लिए ‘सीमा जागरण मंच’ सक्रिय है ! कलाकारों को संगठित करने वाली ‘संस्कार भारती’ का 50 प्रतिशत से अधिक जिलों में पहुच है !  अपने गौरवशाली इतिहास को सम्मुख लाने का प्रयास ‘भारतीय इतिहास संकलन समिति’ कर रही है ! इसी प्रकार विज्ञान भारतीअखिल भारतीय साहित्य परिषदराष्ट्रीय सिख संगतअधिवक्ता परिषदप्रज्ञा प्रवाह आदि अनेक संगठन अपने-अपने क्षेत्र में राष्ट्रीयता के भाव को पुष्ट करने में लगे हैं !

इस प्रकार स्वयंसेवकों द्वारा चलाये जा रहे सैकड़ों छोटे-बड़े संगठन और संस्थाओं द्वारा देश के नागरिको को देशभक्ति का पाठ पढाया जा रहा है परिणामतः देश भर में लोग सरकार की कारगुजारियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते है जिससे सरकार की किरकिरी होती है ! इसलिए सरकार के मंत्री और कांग्रेसी  नेता  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसा देशभक्त संगठन को बदनाम करने की नाकाम कोशिश मात्र अपनी  राजनैतिक रोटी सेंकते है इससे ज्यादा कुछ नहीं ! 1925 में डाकेशव बलिराम हेडगेवार द्वारा संघ रूपी जो बीज बोया गया थावह अब एक विराट वृक्ष बन चुका है ! अब न उसकी उपेक्षा संभव है और न दमन अतः इस मुगालते में किसी  को नहीं रहना चाहिए ! 

-  राजीव गुप्ता ( लेखक )